Bhopal Gas Crisis: बिना शादी के कार्ड नहीं मिलेगा कमर्शियल सिलेंडर! भोपाल प्रशासन का बड़ा फैसला; एक कार्ड पर मिलेंगे सिर्फ 2 सिलेंडर
भोपाल (विचारोदय ब्यूरो): राजधानी भोपाल में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत के बीच प्रशासन ने शादी समारोहों के लिए एक नई और सख्त व्यवस्था लागू कर दी है। अब जिन घरों में शादी है, उन्हें गैस सिलेंडर लेने के लिए न केवल अपनी जेब ढीली करनी होगी, बल्कि शादी का निमंत्रण पत्र (Wedding Card) भी अनिवार्य रूप से जमा कराना होगा।
Bhopal Gas Crisis: बिना शादी के कार्ड नहीं मिलेगा कमर्शियल सिलेंडर!
Bhopal Gas Crisis: शादी के कार्ड पर ही मिलेगी गैस
फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार, गैस कंपनियों के साथ हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि घरेलू सिलेंडरों के अवैध व्यावसायिक उपयोग को रोकने और सीमित स्टॉक को सही लोगों तक पहुँचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।
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क्या लगेगा: शादी का कार्ड, आधार कार्ड और एक लिखित आवेदन (जिसमें कार्यक्रम का स्थान और समय दर्ज हो)।
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कहाँ जमा होगा: यह दस्तावेज पास की संबंधित गैस एजेंसी पर जमा करने होंगे।
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कोटा तय: सिर्फ 2 सिलेंडर, सिक्योरिटी डिपॉजिट ₹4400
नई व्यवस्था के तहत एक शादी के लिए अधिकतम 2 कमर्शियल सिलेंडर ही आवंटित किए जाएंगे।
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डिपॉजिट मनी: प्रत्येक सिलेंडर के लिए ₹2200 का सुरक्षा शुल्क (Security Deposit) जमा करना होगा। यानी 2 सिलेंडर के लिए कुल ₹4400 जमा करने होंगे।
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रिफिलिंग शुल्क: गैस भरवाने का चार्ज ₹1850 प्रति सिलेंडर अलग से देय होगा।
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शर्त: इस्तेमाल के बाद 2 से 3 दिन के भीतर खाली सिलेंडर एजेंसी को लौटाना अनिवार्य है, जिसके बाद डिपॉजिट राशि वापस कर दी जाएगी।
कैटर्स बोले- ‘2 सिलेंडर से क्या होगा?’
प्रशासन के इस फैसले से कैटर्स एसोसिएशन में नाराजगी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष रिंकू भटेजा का कहना है कि शादियों में मेहमानों की संख्या के हिसाब से 2 सिलेंडर ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। सप्लाई की कमी के कारण कई कैटर्स को अपने मेन्यू में कटौती करनी पड़ रही है और मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है।
युद्ध का असर भोपाल की रसोई पर
गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट (ईरान-इजराइल) में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन बाधित हुई है। इसी का असर है कि भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस की किल्लत बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि यह एक अस्थायी व्यवस्था है ताकि कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके।















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