MP Forest Guest House Liquor Meat Ban News: एमपी के टाइगर रिजर्व और फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में बंद होगी शराब और मांसाहार? सरकार को भेजा गया ‘UP-उत्तराखंड’ मॉडल
भोपाल (विचारोदय ब्यूरो): मध्य प्रदेश के विश्वप्रसिद्ध टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभ्यारण्यों की शांति और पवित्रता बनाए रखने के लिए MP Forest Guest House Liquor Meat Ban News एक बड़ा नीतिगत बदलाव हो सकता है। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने मुख्य सचिव (CS) अनुराग जैन और प्रमुख सचिव (वन) संदीप यादव को पत्र लिखकर मांग की है कि एमपी के वन विश्राम गृहों (FRH), निरीक्षण बंगलों और गेस्ट हाउसों में शराब और मांसाहारी भोजन को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।
MP Forest Guest House Liquor Meat Ban News: मनोरंजन स्थल न बनें टाइगर रिजर्व
वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण में देश में अग्रणी है, लेकिन यहाँ के वन विश्राम गृहों में शराब और मांस पर कोई एक समान राज्यव्यापी प्रतिबंध नहीं है। इसके कारण संवेदनशील वन क्षेत्रों को अक्सर ‘संरक्षण केंद्र’ के बजाय ‘मनोरंजन स्थल’ के रूप में देखा जाता है, जो पारिस्थितिक तंत्र (Eco-system) के लिए खतरनाक है।

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इन राज्यों के मॉडल को लागू करने की मांग
पत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र की फॉरेस्ट पॉलिसी का उदाहरण दिया गया है:
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उत्तराखंड: राजाजी और जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के विश्राम गृहों में 1997 से ही शराब और मांस पर सख्त प्रतिबंध है।
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महाराष्ट्र: 2005 से यहाँ के पशु आश्रय गृहों में मांसाहार और शराब प्रतिबंधित है। वन विभाग का मानना है कि मांस का कचरा जंगली जानवरों को इंसानी बस्तियों की ओर आकर्षित करता है।
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उत्तर प्रदेश: दुधवा टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में दशकों से ‘केवल शाकाहारी’ और ‘शराब-मुक्त’ कैंटीन नीति लागू है।

MP Forest Guest House Liquor Meat Ban News: एमपी के टाइगर रिजर्व में बंद होगी शराब और कबाब? सीएस को पत्र
MP Forest Guest House Liquor Meat Ban News: क्यों जरूरी है यह प्रतिबंध?
अजय दुबे ने पत्र में तीन मुख्य कारणों का उल्लेख किया है:
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पारिस्थितिक प्रभाव: बचा हुआ मांस और हड्डियां मांसाहारी जानवरों को गेस्ट हाउस की ओर खींचते हैं, जिससे मानव-पशु संघर्ष का खतरा बढ़ता है।
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पर्यटन अनुशासन: शराब के सेवन के बाद अक्सर शोर-शराबा होता है, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के शांति नियमों का उल्लंघन है।
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कर्मचारियों का संरक्षण: अक्सर रसूखदार मेहमान स्थानीय गार्ड और चौकीदारों पर शराब-मांस उपलब्ध कराने का दबाव बनाते हैं। सरकारी आदेश होने पर कर्मचारी इस दबाव से बच सकेंगे।












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