Indore Shivani Murder Case: कोबरा से मौत का नाटक रचने वाले बैंक अफसर पति को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद
इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले Indore Shivani Murder Case में जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। साल 2019 में हुई शिवानी पटेरिया की सनसनीखेज हत्या के मामले में कोर्ट ने आरोपी बैंक अधिकारी पति अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या को प्राकृतिक सर्पदंश (सांप के काटने) का रूप देने के लिए एक खौफनाक और घिनौनी साजिश रची थी, जिसे फॉरेंसिक साइंस और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बेनकाब कर दिया।
राजस्थान से 30 हजार में खरीदा था ब्लैक कोबरा
यह पूरा मामला Indore Shivani Murder Case के नाम से सुर्खियों में रहा। 1 दिसंबर 2019 को इंदौर के संचार नगर में रहने वाली शिवानी की संदिग्ध हालत में मौत हुई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी अमितेष दिल्ली की किसी लड़की के संपर्क में था और पत्नी को रास्ते से हटाना चाहता था। इसके लिए वह इंदौर से करीब 620 किलोमीटर दूर राजस्थान के अलवर से ₹30,000 में एक ‘ब्लैक डेजर्ट कोबरा’ खरीदकर लाया था। उसने सांप को 11 दिनों तक घर में छुपा कर रखा। मौका पाकर उसने तकिए से शिवानी का गला घोंट दिया और फिर साजिश के तहत कोबरा को मारकर उसके दांत मृत पत्नी के हाथ पर गड़ा दिए ताकि पुलिस इसे सांप के काटने से हुई मौत समझे।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली आरोपी पति की पोल
शातिर आरोपी ने डॉक्टरों और पुलिस को यही कहानी सुनाई कि शिवानी की मौत सर्पदंश से हुई है। लेकिन शिवानी के मायके पक्ष के संदेह जताने पर जब कनाडिया पुलिस ने जांच शुरू की, तो फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी बदल दी:
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गला घोंटने से हुई मौत: मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि शिवानी की मौत सांप के जहर से नहीं, बल्कि तकिए से मुंह और नाक दबाकर दम घोंटने के कारण हुई थी।
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अस्त-व्यस्त बिस्तर: घटनास्थल पर बिस्तर की चादर और तकिए के कवर पर मिले लार के धब्बों ने कनाडिया पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया।
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वैज्ञानिक अंतर: विशेषज्ञों के अनुसार, जीवित व्यक्ति को सांप के डसने और मृत शरीर पर सांप के दांत गड़ाने के वैज्ञानिक साक्ष्यों में बड़ा अंतर होता है, जिससे आरोपी का झूठ पकड़ा गया।
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कोबरा की हत्या मामले में भी मिली 3 साल की सजा
इस Indore Shivani Murder Case का एक और चौंकाने वाला कानूनी पहलू यह रहा कि आरोपी ने अपनी साजिश के लिए एक संरक्षित वन्यजीव की जान ली। इसी वजह से उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51 के तहत भी केस दर्ज किया गया था।
कमला नेहरू वन्य प्राणी संग्रहालय के वेटरनरी एक्सपर्ट डॉ. उत्तम यादव की रिपोर्ट ने कोर्ट में साबित किया कि वह सांप बेहद विषैला कोबरा था। भले ही शिवानी की मौत सांप के काटने से नहीं हुई, लेकिन अमितेष द्वारा उस बेजुबान संरक्षित जीव की हत्या करना अदालत में साबित हो गया, जिसके लिए उसे 3 साल के कड़े कारावास और ₹25,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
साढ़े छह साल बाद मिला शिवानी को न्याय
24 जून 2026 को करीब साढ़े छह वर्ष तक चली लंबी अदालती सुनवाई, कॉल रिकॉर्डिंग्स, वॉइस सैंपल्स और पड़ोसियों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने अमितेष को दोषी माना। कोर्ट ने अमितेष पटेरिया को मुख्य रूप से तीन अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई:
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हत्या (धारा 302): उम्रकैद की सजा।
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (धारा 51): 3 साल का सश्रम कारावास।
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साक्ष्य मिटाने (धारा 201): 2 साल की जेल।















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