MP Pharma Crisis: मध्य प्रदेश में दवाओं का उत्पादन संकट में! चीन से कच्चा माल बंद, 300 फार्मा यूनिट्स में ‘शटडाउन’ का खतरा
इंदौर/पीथमपुर (विचारोदय ब्यूरो): मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक तनाव की आंच अब मध्य प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री तक पहुँच गई है। चीन से आने वाले रॉ मटेरियल (API) की सप्लाई बाधित होने और गैस की किल्लत के कारण प्रदेश में MP Pharma Crisis गहरा गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि प्रदेश की करीब 300 फार्मा यूनिट्स में अब तीन शिफ्ट की जगह सिर्फ एक शिफ्ट में काम हो रहा है।

MP Pharma Crisis: एमपी में दवाओं का उत्पादन ठप!
MP Pharma Crisis: रॉ मटेरियल 50% तक महंगा, सप्लाई चेन टूटी
इंडियन ड्रग्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन (IDMA) के अनुसार, दवाओं के निर्माण में लगने वाले कच्चे माल की कीमतों में 30% से 50% तक की भारी बढ़ोत्तरी हुई है।
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चीन पर निर्भरता: पैरासिटामोल, एजिथ्रोमाइसिन और पेनिसिलिन जैसे साल्वेंट का रॉ मटेरियल पूरी तरह चीन से आता है, जिसकी सप्लाई चेन वर्तमान में टूट चुकी है।
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पेट्रोकेमिकल्स का असर: दवाओं की पॉलिशिंग और फिनिशिंग में इस्तेमाल होने वाले प्रोपलीन ग्लाइकोल और एसीटोन जैसे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की लागत बढ़ने से प्रोडक्शन कॉस्ट बेकाबू हो गई है।

MP Pharma Crisis: एमपी में दवाओं का उत्पादन ठप!
रोजमर्रा की दवाएं हुईं महंगी, आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ
इस MP Pharma Crisis का सीधा असर उन दवाओं पर पड़ रहा है जो हर घर की जरूरत हैं।
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प्रभावित दवाएं: पैरासिटामोल, एजिथ्रोमाइसिन (एंटीबायोटिक), शुगर और बीपी (ब्लड प्रेशर) की दवाओं के दाम बढ़ गए हैं।
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उत्पादन लागत: दवा निर्माताओं का कहना है कि 15 रुपये में 10 गोली बनाने की लागत भी अब नहीं निकल पा रही है। सरकार द्वारा दी गई 6.5% से 20% तक की प्राइस हाइक की छूट भी अब नाकाफी साबित हो रही है।
इंजेक्शन और एम्पुल निर्माण पर भी संकट
आने वाले दिनों में इंजेक्शन की बोतलों (एम्पुल) की कमी हो सकती है।
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एलपीजी की किल्लत: इंजेक्शन की कांच की बोतलों को लॉक करने के लिए हाई-प्रेशर एलपीजी गैस की जरूरत होती है। पीएनजी (PNG) में इतना प्रेशर नहीं होता कि वह फ्रैक्शन ऑफ सेकेंड्स में कांच को मेल्ट कर सके।
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गैस की अनिश्चित सप्लाई के कारण इंजेक्शन बनाने वाली कंपनियां भी केवल एक शिफ्ट में काम करने को मजबूर हैं।
एक्सपर्ट व्यू: क्या होगा आगे?
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के अनुसार, अगर जल्द ही चीन और मिडिल ईस्ट से सप्लाई चेन बहाल नहीं हुई, तो कई यूनिट्स में पूरी तरह ‘शटडाउन’ की स्थिति बन जाएगी। इससे न केवल दवाओं की किल्लत होगी, बल्कि इनकी कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं।













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