MP Farmers Debt Report 2026: मध्य प्रदेश के किसानों पर कितना है कर्ज का बोझ? संसद में पेश रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
नई दिल्ली/भोपाल: देश के अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति को लेकर संसद में एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की गई है। इस ताजा MP Farmers Debt Report 2026 के अनुसार, मध्य प्रदेश के किसानों की स्थिति मिली-जुली नजर आ रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, एमपी के प्रति किसान परिवार पर औसत बकाया कर्ज ₹74,420 है।

MP Farmers Debt Report 2026: मध्य प्रदेश के किसानों पर कितना है कर्ज का बोझ?
राष्ट्रीय औसत के करीब है मध्य प्रदेश (MP vs National Average)
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मध्य प्रदेश में किसानों पर कर्ज का बोझ राष्ट्रीय औसत (₹74,121) के लगभग बराबर है। हालांकि, पड़ोसी राज्य राजस्थान की तुलना में एमपी के किसान बेहतर स्थिति में हैं।
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राजस्थान: प्रति किसान परिवार ₹1,13,865 का कर्ज।
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मध्य प्रदेश: प्रति किसान परिवार ₹74,420 का कर्ज।
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उत्तर प्रदेश: ₹51,107 का औसत कर्ज।
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KCC कर्ज ₹10 लाख करोड़ के पार
कृषि मंत्री ने सदन को बताया कि 30 सितंबर 2025 तक देश में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत बकाया धनराशि ₹10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। MP Farmers Debt Report 2026 यह भी दर्शाती है कि दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे आंध्र प्रदेश और केरल) में उत्तर भारत के मुकाबले कर्ज का दबाव कहीं अधिक है।

MP Farmers Debt Report 2026: मध्य प्रदेश के किसानों पर कितना है कर्ज का बोझ?
कर्ज के मामले में टॉप-5 राज्य (Table)
| राज्य | प्रति परिवार औसत कर्ज (रुपये में) |
| आंध्र प्रदेश | ₹2,45,554 |
| केरल | ₹2,42,482 |
| पंजाब | ₹2,03,249 |
| हरियाणा | ₹1,82,922 |
| तेलंगाना | ₹1,52,113 |
मोहन यादव सरकार का ‘किसान कल्याण वर्ष’ मिशन
बढ़ते कर्ज को देखते हुए मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। सरकार किसानों को कर्ज के चक्र से बाहर निकालने के लिए निम्नलिखित कदम उठा रही है:
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0% ब्याज योजना: प्रदेश के किसानों को जून 2026 तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण मिलता रहेगा।
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ब्याज अनुदान: समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को 4% अतिरिक्त ब्याज अनुदान (Interest Subsidy) दिया जाएगा।
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डिफॉल्टरों को राहत: सहकारी बैंकों के डिफॉल्टर किसानों को दोबारा लोन देने की योजना पर काम शुरू हो गया है।
सिंचाई का विस्तार: नर्मदा-क्षिप्रा जैसी नदी जोड़ो परियोजनाओं के माध्यम से सिंचाई का रकबा बढ़ाकर खेती को मुनाफे का सौदा बनाने की कोशिश की जा रही है।













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