MP Ayushman Action: आयुष्मान भारत योजना में बड़ा ‘क्लीन स्वीप’! एमपी के 126 अस्पतालों की मान्यता रद्द; भोपाल-इंदौर सहित 4 बड़े शहरों में अब नहीं मिलेगा फ्री इलाज
भोपाल (विचारोदय ब्यूरो): मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रदेश के चार प्रमुख शहरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर—में कुल 126 निजी अस्पतालों को योजना से बाहर (De-empanelled) कर दिया गया है। इन अस्पतालों में अब आयुष्मान कार्ड धारकों को मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिल सकेगी।

MP Ayushman Action: एमपी में 126 अस्पतालों की मान्यता रद्द, आयुष्मान कार्ड से अब नहीं होगा फ्री इलाज
MP Ayushman Action: क्यों गिर गई अस्पतालों पर गाज?
आयुष्मान कार्यालय द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई का मुख्य कारण NABH (National Accreditation Board for Hospitals & Healthcare Providers) सर्टिफिकेट की जानकारी समय पर न देना है।
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नोटिस की अनदेखी: विभाग ने इन अस्पतालों को पहले ही नोटिस जारी कर सर्टिफिकेट अपडेट करने का मौका दिया था।
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लापरवाही: तय समय सीमा के भीतर जवाब और जरूरी दस्तावेज न देने के कारण इन अस्पतालों की मान्यता तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है।
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रविवार को सूचना: स्वास्थ्य विभाग द्वारा रविवार दोपहर 12 बजे इन सभी अस्पतालों को औपचारिक नोटिस देकर कार्रवाई की जानकारी साझा की जा रही है।
इन 4 शहरों में सबसे ज्यादा असर
प्रदेश के इन चार महानगरों में कुल 398 अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हुए थे, जिनमें से लगभग एक-तिहाई (126) अब बाहर हो चुके हैं:
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भोपाल: सबसे ज्यादा 51 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है।
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ग्वालियर: यहाँ के 33 अस्पताल योजना से बाहर कर दिए गए हैं।
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इंदौर: आर्थिक राजधानी के 30 अस्पतालों की मान्यता रद्द हुई है।
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जबलपुर: यहाँ के 12 अस्पतालों को सूची से हटाया गया है।

MP Ayushman Action: एमपी में 126 अस्पतालों की मान्यता रद्द, आयुष्मान कार्ड से अब नहीं होगा फ्री इलाज
मरीजों की बढ़ेगी मुसीबत
इस MP Ayushman Action के बाद उन हजारों मरीजों के सामने संकट खड़ा हो गया है जो इन निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज के भरोसे थे। अब इन 126 अस्पतालों में भर्ती मरीजों या नए आने वाले आयुष्मान कार्ड धारकों को योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्हें अब केवल उन्हीं अस्पतालों का रुख करना होगा जिनके पास वैध NABH सर्टिफिकेशन और आयुष्मान की मान्यता बरकरार है।
प्रशासन का रुख
आयुष्मान कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए NABH सर्टिफिकेशन अनिवार्य है। जिन अस्पतालों ने मानकों की अनदेखी की है, उन्हें योजना में बने रहने का अधिकार नहीं है।













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