20 मासूमों को बचाने मौत से भिड़ गई Kanchan Bai Neemuch ,मोहन यादव ने किया बड़ा ऐलान

20 मासूमों को बचाने मौत से भिड़ गई Kanchan Bai Neemuch ,मोहन यादव ने किया बड़ा ऐलान
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हजारों मधुमक्खियों के बीच ढाल बनकर खड़ी रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई (Kanchan Bai Neemuch); CM मोहन यादव ने किया बड़ा ऐलान

नीमच, मध्य प्रदेश: संवेदनाएं अभी मरी नहीं हैं, यह साबित कर दिखाया है नीमच जिले के जावद तहसील के रानपुर गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल ने। सोमवार, 1 फरवरी को हुई एक ऐसी घटना जिसने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया, वहीं कंचन बाई के Kanchan Bai Neemuch Sacrifice ने मानवता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। 20 मासूम बच्चों की जान बचाने के लिए कंचन बाई ने हजारों मधुमक्खियों के हमले को अपने शरीर पर झेला और अंततः अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

20 मासूमों को बचाने मौत से भिड़ गई Kanchan Bai ,मोहन यादव ने किया बड़ा ऐलान

20 मासूमों को बचाने मौत से भिड़ गई Kanchan Bai Neemuch ,मोहन यादव ने किया बड़ा ऐलान

2. रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर: तिरपाल और साड़ी बनी बच्चों की ढाल

हादसा उस वक्त हुआ जब आंगनबाड़ी में बच्चे खेल रहे थे। अचानक पास के पेड़ से मधुमक्खियों के एक बड़े झुंड ने हमला कर दिया।

  • भीषण हमला: जब लोग अपनी जान बचाकर इधर-उधर भाग रहे थे, तब कंचन बाई पीछे नहीं हटीं।

  • अदम्य साहस: कंचन बाई ने तुरंत पास पड़ी तिरपाल और अपनी साड़ी को ढाल बनाया। उन्होंने मासूम बच्चों को उसमें लपेट लिया ताकि मधुमक्खियां उन तक न पहुँच सकें।

  • अंतिम सांस तक संघर्ष: हजारों मधुमक्खियों के डंक से कंचन का शरीर नीला पड़ता जा रहा था, लेकिन Kanchan Bai Neemuch Sacrifice की महानता देखिए, उन्होंने तब तक हार नहीं मानी जब तक कि आखिरी बच्चा सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुँच गया।

20 मासूमों को बचाने मौत से भिड़ गई Kanchan Bai ,मोहन यादव ने किया बड़ा ऐलान

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3. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा फैसला: मुआवजे और शिक्षा का ऐलान

इस वीरांगना के बलिदान की गूंज जब वल्लभ भवन तक पहुँची, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने Kanchan Bai Neemuch Sacrifice को नमन करते हुए परिवार के लिए निम्नलिखित घोषणाएं की हैं:

  • ₹4 लाख की सहायता राशि: सरकार ने पीड़ित परिवार को तत्काल राहत के रूप में ₹4 लाख की मुआवजा राशि देने का निर्देश दिया है।बच्चों की पढ़ाई का खर्च: कंचन बाई के पीछे छूटे उनके मासूम बच्चों की पूरी शिक्षा का जिम्मा अब मध्य प्रदेश सरकार उठाएगी।

  • शोक संवेदना: मुख्यमंत्री ने इस घटना को “अत्यंत दुखद व हृदयविदारक” बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश अपनी इस बहादुर बेटी को कभी नहीं भूलेगा।

  • मधुमक्खियों का हमला न केवल दर्दनाक होता है, बल्कि कुछ लोगों के लिए यह जानलेवा (Allergic Reaction) भी साबित हो सकता है। नीमच की घटना में हमने देखा कि कैसे डंक के जहर ने एक जीवन छीन लिया।

  • ऐसी स्थिति में Medical Science और First Aid (प्राथमिक उपचार) के अनुसार क्या करना चाहिए, यहाँ उसका विस्तृत विवरण दिया गया है:

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    1. हमले के तुरंत बाद: प्राथमिक उपचार (Immediate Action)

    • डंक (Stinger) को निकालें: जितनी जल्दी हो सके डंक को बाहर निकालें। डंक निकालने के लिए चिमटी (Tweezers) का इस्तेमाल करने के बजाय अपने नाखूनों या किसी क्रेडिट कार्ड जैसी सख्त चीज़ से रगड़कर (Scrape) निकालें। चिमटी से दबाने पर डंक की थैली से और ज़हर शरीर में जा सकता है।

    • साबुन और पानी: प्रभावित हिस्से को तुरंत ठंडे पानी और माइल्ड साबुन से धोएं ताकि संक्रमण का खतरा कम हो और बाहरी ज़हर निकल जाए।

    • बर्फ की सिकाई (Cold Compress): सूजन और दर्द कम करने के लिए कम से कम 10-15 मिनट तक बर्फ से सिकाई करें। इससे ज़हर के फैलने की गति धीमी हो जाती है।


    2. मेडिकल उपचार (Medical Treatment & Medicines)

    जब हमला गंभीर हो, तो डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित दवाओं की सलाह देते हैं:

    • Antihistamines (एलर्जी रोधक): शरीर में हिस्टामाइन के प्रभाव को कम करने के लिए Cetirizine या Loratadine जैसी दवाएं दी जाती हैं। यह खुजली और हल्की सूजन को नियंत्रित करती हैं।

    • Pain Relief (दर्द निवारक): दर्द को कम करने के लिए Ibuprofen या Acetaminophen (Paracetamol) का उपयोग किया जाता है।

    • Topical Creams: डंक वाली जगह पर जलन कम करने के लिए Hydrocortisone Cream या Calamine Lotion लगाना चाहिए।

    • Baking Soda Paste: घरेलू उपचार के तौर पर बेकिंग सोडा और पानी का गाढ़ा पेस्ट डंक के अम्लीय (Acidic) जहर को बेअसर करने में मदद करता है।


    3. ‘एनाफिलेक्टिक शॉक’ (Anaphylactic Shock) – जब स्थिति गंभीर हो

    कुछ लोगों को मधुमक्खी के ज़हर से Anaphylaxis हो जाता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसके लक्षण पहचानें:

    1. सांस लेने में भारी कठिनाई।

    2. चेहरे, होंठ या गले में अत्यधिक सूजन।

    3. चक्कर आना या बेहोश हो जाना।

    4. दिल की धड़कन का तेज होना।

    5. शरीर पर लाल चकत्ते (Hives) पड़ना।

    ऐसी स्थिति में क्या करें?

    • बिना देरी किए तुरंत Emergency Hospital ले जाएं।

    • डॉक्टर ऐसे मरीजों को फौरन Epinephrine (Adrenaline) Injection देते हैं, जो जान बचाने के लिए सबसे ज़रूरी दवा है

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  • 4. बचाव के महत्वपूर्ण उपाय (Prevention Tips)

    • न भागें, न हाथ चलाएं: यदि मधुमक्खी आस-पास हो, तो हाथ-पांव मारना बंद कर दें। वह हिलती हुई चीज़ों पर ज़्यादा हमला करती हैं। शांति से वहां से निकल जाएं।

    • सुगंध से बचें: तेज़ परफ्यूम, डियोड्रेंट या खुशबूदार तेल मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं।

    • चटक रंग: गहरे और फूलों जैसे चटक रंग के कपड़े पहनने से बचें।

    • मुंह और नाक ढकें: मधुमक्खियां अक्सर चेहरे पर हमला करती हैं। अगर हमला हो जाए, तो अपनी साड़ी, कमीज या कंबल से चेहरे को ढंकना सबसे महत्वपूर्ण है।

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