शांति से नहीं तो क्रांति से लगेगी प्रतिमा,भीम सेना को राेका अंबेडकर की प्रतिमा पर तनाव

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ग्वालियर-मुरैना बॉर्डर पर “भीम सेना’ को राेका, 29 को फूलबाग पर भीमराव अग्निपथ महासभा का ऐलान

ग्वालियर में  पुलिस और भीम सेना आमने-सामने, ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा की स्थापना को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद भीम सेना ने सभा और रैली का ऐलान किया, जिससे शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। भीम सेना के कार्यकर्ताओं की रैली को रोकने के लिए ग्वालियर-मुरैना बॉर्डर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। जगह-जगह बैरिकेड्स लगाए गए और लगभग 800 पुलिसकर्मी तैनात किए गए।

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बिना अनुमति के रैली, पुलिस ने रोका काफिला

सोमवार को दोपहर 3 बजे भीम सेना के कार्यकर्ता रैली के रूप में आगे बढ़े, लेकिन उन्हें निरावली पॉइंट पर रोक दिया गया। जब नेताओं ने अंदर जाने की कोशिश की, तो पुलिस ने रैली की अनुमति दिखाने को कहा। इस पर विवाद हो गया। मौके पर मौजूद भीम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल सिंह तंवर ने इसे “दलितों पर अत्याचार” करार दिया और कहा कि अगर शांति से प्रतिमा नहीं लगाई जा सकती तो वे क्रांति का रास्ता अपनाएंगे।

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उनका कहना था, “हम अपने भगवान को माला भी नहीं पहना सकते, तो इसका मतलब संविधान अभी लागू नहीं हुआ। भाजपा की सरकार में दलितों के साथ अन्याय हो रहा है। लेकिन अब दलित समाज जागरूक हो चुका है और एकजुट है।”

29 जून को ‘भीमराव अग्निप

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थ महासभा’ का ऐलान

भीम सेना ने ऐलान किया है कि 29 जून को ग्वालियर के फूलबाग मैदान पर ‘भीमराव अग्निपथ महासभा’ का आयोजन किया जाएगा। इस महासभा में पूरे देश से दलित समाज के लोग जुटेंगे। सभा का उद्देश्य डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को प्रस्तावित स्थान पर स्थापित कराना है। नवाब सतपाल सिंह तंवर ने कहा, “यह हमारी आस्था का विषय है। हम किसी भी कीमत पर अंबेडकर की मूर्ति हाईकोर्ट परिसर में लगाएंगे।”

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दिल्ली से भी पहुंचे थे नेता, शहर में नहीं मिली एंट्री

दिल्ली से भीम सेना के लगभग 50 वाहन मुरैना सीमा तक पहुंचे लेकिन उन्हें ग्वालियर शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। यह वाहन दिल्ली, आगरा और धौलपुर होते हुए आए थे। सीमा पर ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया और लंबी बहस के बाद भी उन्हें शहर में घुसने नहीं दिया गया। पुलिस का तर्क था कि इससे शहर में तनाव का माहौल बन सकता है।

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एएसपी कृष्ण लालचंदानी के अनुसार, “भीम सेना के पास सभा की अनुमति नहीं थी, इसलिए उन्हें शहर की सीमा पर ही रोक दिया गया। उनसे ज्ञापन लिया गया है जिसे न्यायालय को भेजा जाएगा।”

प्रशासन सख्त, शहर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

ग्वालियर प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। फूलबाग मैदान, हाईकोर्ट और शहर के प्रमुख इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। ड्रोन से निगरानी की जा रही है और प्रमुख चौराहों पर बैरिकेड्स लगाकर वाहनों की चेकिंग की जा रही है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में कानून व्यवस्था न बिगड़ने दी जाए।

भीम सेना का आरोप: यह हमारी धार्मिक आस्था पर हमला

भीम सेना के नेताओं का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ मामला है। नवाब सतपाल सिंह तंवर ने कहा, “हम बाबा साहब को भगवान मानते हैं। अगर हम उन्हें सम्मान नहीं दे सकते, तो यह हमारे संविधान और लोकतंत्र की विफलता है।”

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उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार दलितों को दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन अब दलित समाज चुप नहीं बैठेगा। “शांति से अगर अंबेडकर प्रतिमा नहीं लगाई गई तो हम क्रांति का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।”

क्या कहता है प्रशासन?

प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुमति नहीं दी गई। चूंकि हाईकोर्ट परिसर एक संवेदनशील स्थान है और वहां किसी भी नई संरचना की अनुमति न्यायालय स्तर से ही दी जाती है, इसलिए बिना अनुमति के सभा या रैली नहीं की जा सकती। प्रशासन ने किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

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समाज में बनी हलचल

इस पूरे मामले ने ग्वालियर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में दलित समाज को आंदोलित कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग इसे दलितों के अधिकारों पर हमला बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक स्टंट भी करार दे रहे हैं। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि अंबेडकर की प्रतिमा को लेकर समाज में गहरा भावनात्मक जुड़ाव है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

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