Lakshman Tiwari Resigns from Congress: मऊगंज के दिग्गज नेता ने पार्टी नेतृत्व को घेरा; कहा- कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की अनदेखी, अब शुरू होगा जन-आंदोलन।
मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विंध्य क्षेत्र के कद्दावर नेता और मऊगंज के पूर्व विधायक Lakshman Tiwari लक्ष्मण तिवारी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। Lakshman Tiwari Resigns from Congress की खबर ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से तिवारी ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कांग्रेस संगठन और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखे प्रहार किए।
2. इस्तीफे की बड़ी वजह: ‘उपेक्षा और गुटबाजी’
पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में संगठन नाम की चीज नहीं बची है। उन्होंने बताया कि Lakshman Tiwari Resigns from Congress का फैसला उन्होंने भारी मन से लिया है क्योंकि पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं की बात सुनने वाला कोई नहीं है।
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जीतू पटवारी पर निशाना: तिवारी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और स्थानीय नेताओं ने उनकी लगातार अनदेखी की।
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संगठन में दरार: उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में केवल कुछ चुनिंदा लोग ही फैसले लेते हैं, जबकि जमीन पर काम करने वाले नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है।
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3. ‘उपेक्षा’ का दौर: 2 अप्रैल से शुरू हुई कहानी
लक्ष्मण तिवारी ने बताया कि उन्होंने 2 अप्रैल 2024 को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। उस समय उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी जनहित के मुद्दों पर काम करेगी, लेकिन Lakshman Tiwari Resigns from Congress के पीछे का सच यह है कि ज्वाइनिंग के पहले दिन से ही उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कई बार वरिष्ठ नेतृत्व को पत्र लिखे और मिलकर अपनी बात कहनी चाही, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
4. मऊगंज की राजनीति और ‘नोटिस’ का विवाद
मऊगंज क्षेत्र में लक्ष्मण तिवारी का अपना एक बड़ा जनाधार है। इसके बावजूद पार्टी के स्थानीय कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाता था।
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विवादित बयान: हाल ही में एक कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं की अनुपस्थिति से नाराज होकर तिवारी ने पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह बन्ना के खिलाफ विवादित टिप्पणी कर दी थी।

पूर्व विधायक Lakshman Tiwari का इस्तीफा
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अनुशासनात्मक कार्रवाई: इस बयान के बाद पार्टी ने उन्हें नोटिस जारी किया, जिसे तिवारी ने अपनी ‘बेइज्जती’ के तौर पर देखा। इसी घटनाक्रम ने Lakshman Tiwari Resigns from Congress की नींव रखी।
5. राजनीतिक सफर: कई दलों की यात्रा
लक्ष्मण तिवारी का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे अपनी विचारधारा और जनता के मुद्दों के लिए दल बदलने से भी पीछे नहीं हटे:
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सवर्ण समाज पार्टी
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भारतीय जनशक्ति पार्टी
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भारतीय जनता पार्टी (BJP)
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समाजवादी पार्टी (2023 चुनाव लड़ा)
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कांग्रेस (2024 में शामिल हुए)
6. भविष्य की रणनीति: ‘जन आंदोलन’ जारी रहेगा
इस्तीफे के बाद तिवारी ने यह साफ कर दिया कि वह फिलहाल किसी अन्य दल (जैसे बीजेपी या सपा) में शामिल नहीं हो रहे हैं। हालांकि, उन्होंने Lakshman Tiwari Resigns from Congress के बाद अपनी भविष्य की योजना बताते हुए कहा कि वे चुप नहीं बैठेंगे और जनता के हक की लड़ाई के लिए ‘जन आंदोलन’ की शुरुआत करेंगे।
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A. विंध्य में कांग्रेस की कमजोर स्थिति
विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस के पास जनाधार वाले नेताओं की कमी हो रही है। Lakshman Tiwari Resigns from Congress जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि पार्टी अपने ‘मास लीडर्स’ को संभाल कर रखने में विफल हो रही है। लक्ष्मण तिवारी का जाना मऊगंज और रीवा बेल्ट में कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।
B. जीतू पटवारी के नेतृत्व पर उठते सवाल
जब से जीतू पटवारी ने प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाली है, पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें बार-बार आ रही हैं। Lakshman Tiwari Resigns from Congress के दौरान लगाए गए आरोप सीधे तौर पर नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं। क्या कांग्रेस में सचमुच गुटबाजी हावी है? इस पर एक विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है।
C. दल-बदल की राजनीति और मतदाता का नजरिया
लक्ष्मण तिवारी ने कई पार्टियां बदली हैं, लेकिन उनका व्यक्तिगत प्रभाव अभी भी बना हुआ है। Lakshman Tiwari Resigns from Congress के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि मऊगंज की जनता उनके ‘जन आंदोलन’ को कितना समर्थन देती है।
D. मऊगंज का सियासी समीकरण
मऊगंज के नए जिले बनने के बाद वहां की राजनीति और अधिक जटिल हो गई है। लक्ष्मण तिवारी और सुखेन्द्र सिंह बन्ना के बीच की अदावत ने कांग्रेस की आंतरिक कलह को सड़क पर ला दिया है।
Lakshman Tiwari Resigns from Congress मध्य प्रदेश की राजनीति में केवल एक इस्तीफा नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में मौजूद कमियों का संकेत है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस नुकसान की भरपाई कैसे करती है।












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