कौन हैं भारत की 16वीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

कौन हैं भारत की 16वीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ? भारत की 16वीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का परिचय,द्रौपदी मुर्मू झारखंड की राज्यपाल रह चुकी हैं
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कौन हैं भारत की 16वीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ? द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को मयूरभंज जिले के बैदापोसी गाँव में हुआ था. वो संथाल आदिवासी हैं और उनके पिता बिरंची नारायण टुडू अपनी पंचायत के मुखिया रहे हैं. द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली महिला और आदिवासी राज्यपाल थीं. वो झारखंड में सबसे लंबे वक़्त (छह साल से कुछ अधिक वक़्त) तक राज्यपाल रहीं. यहां से सेवानिवृति के बाद वो अपने गृह राज्य ओड़िशा के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में रहती हैं. यह उनके पैतृक गांव बैदापोसी का प्रखंड मुख्यालय है.

राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज करने वाली द्रौपदी मुर्मू झारखंड की राज्यपाल रह चुकी हैं. द्रौपदी मुर्मू ने इस चुनाव में पहली वरीयता वाले 2,824 वोट हासिल किए. वहीं, उनके प्रतिद्वंदी यशवंत सिन्हा को प्रथम वरीयता के 1,877 वोट मिले.
इस चुनाव में कुल 4,754 वोट पड़े, जिसमें से 4,701 वोट वैध थे, जबकि 53 अमान्य क़रार दिए गए. द्रौपदी मुर्मू आगामी 25 जुलाई को राष्ट्रपति के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगी.
16 वीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कोंन हैं

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को मयूरभंज जिले के बैदापोसी गाँव में हुआ था. वो संथाल आदिवासी हैं और उनके पिता बिरंची नारायण टुडू अपनी पंचायत के मुखिया रहे हैं. द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली महिला और आदिवासी राज्यपाल थीं. वो झारखंड में सबसे लंबे वक़्त (छह साल से कुछ अधिक वक़्त) तक राज्यपाल रहीं. यहां से सेवानिवृति के बाद वो अपने गृह राज्य ओड़िशा के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में रहती हैं. यह उनके पैतृक गांव बैदापोसी का प्रखंड मुख्यालय है.

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साल 1979 में भुवनेश्वर के रमादेवी महिला कॉलेज से बीए पास करने वाली द्रौपदी मुर्मू ने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत ओडिशा सरकार के लिए क्लर्क की नौकरी से की. उस दौर में मुर्मू सिंचाई और ऊर्जा विभाग में जूनियर सहायक थीं. बाद के सालों में वह शिक्षक भी रहीं. मुर्मू ने रायरंगपुर के श्री अरविंदो इंटिग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर में मानद शिक्षक के तौर पर पढ़ाया. द्रौपदी मुर्मू ने अपने सियासी करियर की शुरुआत वार्ड काउंसलर के तौर पर साल 1997 में की थी.

रायरंगपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर दो बार (साल 2000 और 2009) विधायक भी बनीं. पहली दफ़ा विधायक बनने के बाद वे साल 2000 से 2004 तक नवीन पटनायक के मंत्रिमंडल में स्वतंत्र प्रभार की राज्यमंत्री रहीं. साल 2015 में जब उन्हें पहली बार राज्यपाल बनाया गया, उससे ठीक पहले तक वे मयूरभंज जिले की बीजेपी अध्यक्ष थीं. साल 2002 से 2009 और साल 2013 से अप्रैल 2015 तक इस मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रहीं थी. इसके बाद वह झारखंड की राज्यपाल मनोनीत कर दी गईं और बीजेपी की सक्रिय राजनीति से अलग हो गईं.

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द्रौपदी मुर्मू की शादी श्याम चरण मुर्मू से हुई थी लेकिन कम उम्र में ही उनका निधन हो गया. उनकी तीन संतानें थीं लेकिन इनमें से दोनों बेटों की मौत भी असमय हो गई. मुर्मू की बेटी इतिश्री मुर्मू हैं, जो रांची में रहती हैं. उनकी शादी गणेश चंद्र हेम्बरम से हुई है. द्रौपदी मुर्मू ने एक अध्यापिका के रूप में अपना व्यावसायिक जीवन आरम्भ किया। उसके बाद धीरे-धीरे राजनीति में आ गयीं.

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