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मध्य प्रदेश के इन सीटों पर दिग्गज नेताओं की कड़ी मेहनत के बाद गिरा वोट प्रतिशत {Vote percentage dropped}

पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार वोट प्रतिशत में लगभग 2-4% तक गिरावट देखने को मिली है इसमें मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में सबसे कम वोटिंग देखने को मिली है मालवा-निमाड़ में बंपर वोटिंग के लिए पहचानी जाने वाली आदिवासी बहुल सीटें रतलाम, धार और खरगोन में पिछले चुनाव की अपेक्षा 2.8 से 3.75 प्रतिशत तक कम मतदान हुआ है। दोनों ही दलों को आदिवासी मतदाताओं से बड़ी उम्मीदें हैं। इसलिए इन सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी थी।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खरगोन और धार तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी रतलाम और खरगोन क्षेत्र में सभा कीं। वहीं, मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव सहित भाजपा-कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इन्हें साधने के लिए पूरा जोर लगा दिया। रतलाम में 72.86, धार में 71.50 प्रतिशत और खरगोन में 75.79 प्रतिशत मतदान हुआ है। 2019 के मुकाबले मतदान प्रतिशत की बात करें तो रतलाम में 2.8 प्रतिशत, धार में 3.75 प्रतिशत और खरगोन में 2.03 प्रतिशत मतदान कम मतदान हुआ है।

वहीं खरगोन लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी एवं वर्तमान सांसद गजेंद्र पटेल, कांग्रेस प्रत्याशी पोरलाल खरते के विरुद्ध चुनाव लड़ रहे है। रतलाम संसदीय सीट से तीन मंत्री आते हैं। विधानसभा सीट रतलाम सिटी से चैतन्य कुमार काश्यप, आलीराजपुर से नागर सिंह चौहान और पेटलावद से निर्मला भूरिया मंत्री चुनकर आई हैं। इन्हें यहां मतदान बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन मंत्रियों की कड़ी मेहनत के बावजूद रतलाम में कम मतदान हुआ।

संसदीय सीट– 2014– 2019– 2024– मतदान घटा

रतलाम — 63.62– 75.66– 72.86 — 2.8 प्रतिशत

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धार — 64.55– 75.25– 71.50– 3.75 प्रतिशत

खरगोन — 67.67– 77.82–75.79– 2.03 प्रतिशत

बावजूद इसके दोनों ही दल आदिवासियों को मतदान के लिए घर से निकालने में सफल नहीं हो सके। चौथे चरण की इन लोकसभा सीटों पर प्रत्येक चुनाव में आदिवासी मतदाता बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। पिछले चुनाव में भी इनके कारण तीनों सीटों पर 75 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था और पांच माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में धार और खरगोन में कांग्रेस ने बढ़त बनाई थी।

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