पिछले चालीस दिन के भीतर देश में करीब 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इस समय देश जब कोरोना संक्रमण के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है तो टीकाकरण में गिरावट आने को विशेषज्ञ बेहद गंभीर और चिंताजनक मानते हैं। पिछले माह अप्रैल में टीकाकरण में खासा तेजी दर्ज की गई थी पर अब मई आते ही रोजाना लगने वाली खुराकों की संख्या आधी रह गई है। गौरतलब है कि एक मई से 18 साल से पार वालों के लिए टीकाकरण शुरू हो गया था।

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50.88% कम लगे टीके

कोविड19इंडियाडॉटओआरजी के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में जब संक्रमण ने जोर पकड़ा तो टीकाकरण में तेजी आयी थी और 10 अप्रैल को 36,59,356 खुराके एक दिन में लगायी गईं जो अब तक का एक दिन में किया गया रिकॉर्ड टीकाकरण है। पर इसके बाद रोजाना उपयोग होने वाली खुराकों की संख्या में कमी आने लगी। 21 मई को चौबीस घंटों के भीतर 17,97,274 डोज ही लगायी गईं। इन 40 दिनों के भीतर टीकाकरण में 50.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

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मई में लगातार गिरावट

पिछले माह अप्रैल में भारत में औसतन प्रतिदिन 30,24,362 खुराकें लगायी जा रही थीं। जबकि मई में यह संख्या प्रतिदिन औसतन 16,22,087 डोज ही रह गई। कोविड19इंडिया ओआरजी के मुताबिक, एक मई से 20 मई तक मात्र पांच दिन ऐसे हुए जब रोजाना टीकाकरण 20 से 22 लाख खुराकों तक पहुंचा। अन्य दिनों में रोजाना टीकाकरण का आंकड़ा 20 लाख से कम ही बना रहा। यही कारण रहा कि कोविन पोर्टल पर लोगों को टीकाकरण के लिए स्लॉट ढूंढे नहीं मिल रहा है। केंद्रों पर वैक्सीन न होने के नोटिस के साथ ताले जड़े हैं।

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अप्रैल में 9 करोड़ और मई में 4 करोड़ टीके लगे

टीकाकरण में आयी गिरावट को इस तरह भी समझा जा सकता है कि अप्रैल में लगभग नौ करोड़ टीके लगाए गए जबकि मई में अब तक चार करोड़ के आसपास ही टीकाकरण हो सका है।

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188 करोड़ खुराकों की जरूरत

भारत में 18 साल से अधिक आबादी के 94 करोड़ लोग हैं, जिन्हें टीके की दो खुराके लगाने के लिए देश को 188 करोड़ खुराकों की जरूरत होगी।

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टीके की कमी

मार्च के अंतिम सप्ताह से भी देश में टीके की कमी की समस्या देखने को मिलने लगी थी जो लगातार बनी हुई है। अब भी कुछ राज्य ऐसे बचे हैं जहां 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण सही ढंग से शुरू नहीं हो पाया है। कई जगह टीकाकरण केंद्रों की संख्या भी घटा दी गई है। हालांकि इस कमी को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने रूसी टीके स्पूतनिक-वी को मंजूरी दे दी थी, जिसकी कुछ खुराके लगायी भी जा चुकी हैं।

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