Shani Dev: शनिदेव की प्रिय माने जाते हैं ये दो पौधे, करें इनसे जुड़े खास उपाय, मिलेंगे फायदे

Shani Dev: शनिदेव की प्रिय माने जाते हैं ये दो पौधे, करें इनसे जुड़े खास उपाय, मिलेंगे फायदे

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शनिदेव को दो पौधे काफी प्रिय होते हैं। अगर इन पौधों की सेवा की जाए तो शनिदोष से मुक्ति मिलती है।

शास्त्रों के अनुसार हर पौधे का संबंध विभिन्न ग्रहों से माना जाता है। न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनिदेव की बुरी दृष्टि पड़े तो, व्यक्ति का जीवन कष्टों से घिर जाता है। शनिदेव को प्रसन्न रखने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति हमेशा अच्छे कर्म करे। शनि दोष से मुक्ति के लिए कई तरह के उपाय किए जा सकते हैं। वहीं शनिदेव को दो पौधे काफी प्रिय होते हैं। अगर इन पौधों की सेवा की जाए, इनसे जुड़े उपाय किए जाए तो शनिदेव प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं।

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शमी का पौधा

शनिदेव को शमी का पौधा काफी प्रिय होता है। शमी के पौधे को घर के पास लगाने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है। साथ ही शनि दोष से भी मुक्ति मिलती है। शमी का पौधा किसी भी स्थिति में जीवित रह सकता है। इसमें छोटे-छोटे कांटे भी होते हैं। शनिवार की शाम को शमी के पौधे के नीचे दीपक जलाने से शनि की वक्र दृष्टि से निजात मिलती है।

उपाय

किसी जातक की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हों तो शमी की लकड़ियों पर तिल के दानों से हवन करना चाहिए। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए शमी के पेड़ के उपाय किए जा सकते हैं।

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पीपल का पेड़

शनि देव को पीपल का पेड़ भी काफी प्रिय होता है। इसकी पूजा करने से शनिदेव बहुत प्रसन्न होते हैं और जीवन की समस्याओं से मुक्ति दिलाते हैं। पीपल के पेड़ को शनि देव के इष्ट श्री कृष्ण का स्वरूप माना जाता है। पीपल के पेड़ की पूजा करने से शनि दोष से होने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है। शनिवार के दिन पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। शनि दोष के कारण सुख-शांति और समृद्धि में रुकावटें आती हैं, इसके लिए पीपल के पौधे लगाने चाहिए।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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