साकार हिंदुत्व का सत्कार यानि पंडित नरोत्तम मिश्रा -डॉ. दुर्गेश केसवानी

हिंदू अस्तित्व की पहचान है कि आप अपनी आस्था से, जन्म से, मन से हिंदू हैं. लेकिन अपनी पहचान के प्रति सजग होना और उसके प्रति चेतना का विकास होना हिंदुत्व है. अर्थात पहचान से हिंदू होने का तात्पर्य है कि क्षमाभाव, प्रेमभाव और आचरण की शुद्धता होना, अहिंसा के रास्ते पर चलना और विविधता को महत्व देना. हिंदू शब्द भाववाचक है. इस देश में एक समय ऐसा भी आया कि लोगों में सेक्युलर दिखने की होड़ मच रही थी, तब भी मध्यप्रदेश का एक ऐसा भी राजनेता था जिसने अपने माथे पर धर्म का विजय तिलक लगाना नहीं छोड़ा था और, आज जब देश में देश की विचारधारा ही हिंदुत्व की तरफ प्रवाहित होने लगी है, आज भी ललाट में वही विजय तिलक और दिल में वही हिन्दू अनुराग दमक रहा है। जी, बिलकुल सही समझे आप, हम बात कर रहे हैं पंडित नरोत्तम मिश्रा जी की।

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अदम्य साहस और शौर्य के प्रतीक डॉ. नरोत्तम मिश्रा -डॉ. दुर्गेश केसवानी

मन, वचन और कर्म से सर्वहारा के प्रति आसक्ति और जरूरतमंदों के लिए जिनके द्वार हमेशा ही खुले रहे, ऐसे ज्येष्ठ, श्रेष्ठ धर्मानुरागी, माँ पीताम्बरा के अनन्य भक्त पंडित नरोत्तम मिश्रा अपने शानदार, जानदार, दमदार और उपलब्धियों, आशीषों, दुआओं से परिपूर्ण जीवन में एक और जन्मोत्सव मनाया रहे हैं।दरअसल नरोत्तम मिश्रा आधुनिक राजनीति में ऐसे बिरले लोगों में शुमार हैं जिन्होंने सुविधा की राजनीती नहीं की, राजनीति में अवसरवाद का मार्ग कभी नहीं चुना। यही वजह तो है कि उन्होंने हिन्दू होने के विषय को गर्व के साथ स्वीकार किया। आचरण की शुद्धता के साथ कर्मकांड में पूरी आस्था, ये आस्था ही तो है कि नरोत्तम जी जब माँ वैष्णव देवी के दर्शनार्थ जाते हैं तो माँ के सामान्य श्रद्धालु होते हैं ।सामान्य लाइन में लगे परसादी के फैले हाथ, माँ के अनुराग से भरा मन जनरल की पंक्ति में भी खड़े मिश्रा को श्रेष्ठ बना देता है।

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मध्यप्रदेश में कई विभागों में मंत्री पद का दायित्व कुशलता और गम्भीरता के साथ संभालने वाले नरोत्तम मिश्रा न केवल कुशल वक्ता अपितु श्रेष्ठ संगठक और बेहतर नेतृत्वकर्ता भी हैं। श्री रामचरित मानस और श्रीमद गीता के अच्छे जानकारों में शुमार नरोत्तमजी को संगठन ने जब भी कोई जिम्मेदारी दी उन्होंने उसे शतप्रतिशत पूर्ण किया। लोकसभा चुनाव 2019 में कानपुर प्रखंड मे मिले चुनावी जिंम्मेदारी को उन्होंने अपनी दूरदर्शिता के कारण भाजपा को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रचंड जीत दिलाई।दतिया सीट से छह बार के विधायक और शिवराज कैबिनेट में गृह और स्वास्थ्य विभाग संभाल रहे नरोत्तम मिश्रा को मप्र भाजपा के कद्दावर नेताओं में जाना जाता है। नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश की सियासत में बीजेपी का बडा ब्राह्मण चेहरा माने जाते हैं।उनका जन्म 15 अप्रैल, 1960 को ग्वालियर में डॉ. शिवदत्त मिश्रा के घर हुआ था। नरोत्तम बचपन से ही मिलनसार थे। पहले आरएसएस और फिर एबीवीपी के साथ जुड़कर उन्होंने अपनी राजनीतिक करियर की शुरूआत की।
सबसे पहले वे साल 1978 में जीवाजी विश्ववद्यालय में छात्रसंघ के सचिव बने। इसके बाद, उन्होंने आज तक राजनीति में पीछे मुड़कर नहीं देखा। छात्रसंघ सचिव बनने के बाद बीजेपी युवा मोर्चा के प्रान्तीय कार्यकारिणी के सदस्य बनें। इसके बाद साल 1985-87 में उन्हें एमपी भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया। साल 1990 में पहली बार वे विधानसभा पहुंचे। उनके राजनीतिक सूझबूझ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहली बार विधानसभा पहुंचते ही उन्हें विधानसभा सचेतक बना दिया गया था।नरोत्तम साल 1998 में दूसरी बार, 2003 में तीसरी बार, 2008 में चौथी बार, 2013 में पांचवीं बार और 2018 में छठी बार विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। सबसे पहले जून 2005 में उन्हें बाबूलाल गौर की सरकार में राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया था। नरोत्तम अपने स्वभाव की वजह से लोगों के बीच आसानी से घुलमिल जाते हैं। यही कारण है कि उन्होंने राजनीति के मैदान पर अपना वर्चस्व बनाया हुआ है
वर्तमान में मध्य प्रदेश की सियासत में नरोत्तम मिश्रा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं। शुरूआत से ही शिवराज ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया हुआ है। नरोत्तम को गुणा-भाग की राजनीति में माहिर माना जाता है। कहा जाता है कि कमलनाथ की सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए जो ऑपरेशन लोटस चलाया गया था, उसमें इनकी अहम भूमिका थी ।

अदम्य साहस और शौर्य के प्रतीक डॉ. नरोत्तम मिश्रा -डॉ. दुर्गेश केसवानी

प्रदेश में बीजेपी जब भी परेशान होती है। नरोत्तम मिश्रा संकटमोचक के रूप में खड़े नजर आते हैं। यही कारण है कि सत्ता में वापसी के बाद बीजेपी के अंदर से ही उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठने लगी थी। लेकिन उन्होंने साफतौर पर इन बातों से इंकार कर दिया था। दरअसल, वो किसी भी हाल में बस कमलनाथ की सरकार गिराना चाहते थे। क्योंकि जब कांग्रेस सरकार में आई थी तो उनके निशाने पर नरोत्तम मिश्रा थे। जांच के बहाने उन्हें टारगेट किया जा रहा था। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा ने कमलनाथ विरोधियों को लामबंद करना शुरू कर दिया था और आखिरकार काफी रस्साकशी के बाद 20 नवंबर 2020 को कमनाथ ने प्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफा दे दिया।

संकट मोचक डॉ. नरोत्तम मिश्रा कार्यकर्ताओं के सखा,मित्र और मार्गदर्षक साबित हुए -डॉ. दुर्गेश केसवानी

नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश की सियासत में बीजेपी का बडा ब्राह्मण चेहरा माने जाते हैं।शिवराज सरकार के पिछले 3 कार्यकाल में भी वह मंत्री रह चुके हैं। वही तीन बार लगातार दतिया से जीतते चले आ रहे हैं। केंद्रीय नेताओं से अच्छे संपर्क और ग्वालियर-चंबल संभाग की भविष्य की राजनीति को साधने के लिए वे पहली बार में ही मंत्री बनाए गए। मिश्रा को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है, यह वजह है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए नरोत्तम मिश्रा को 2019 के लोकसभा चुनाव में यूपी के कानपुर की लोकसभा सीट का प्रभारी नियुक्त किया था। कमलनाथ सरकार के पतन में भी नरोत्तम की अहम भूमिका रही। भले ही एमपी में कितने ही बडे नेता हो लेकिन राजनीति के मैदान में वर्चस्व कायम करते हुए मिश्रा अलग ही पहचान बनाए हुए है।यही कारण है कि मध्य प्रदेश की सियासत में बीजेपी पर जब भी परेशानी आई है तो नरोत्तम मिश्रा संकटमोचक के रूप में खड़े नजर आए हैं।

-लेखक भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के प्रदेश प्रवक्ता है।

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