वन रैंक वन पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट ने पुर्नविचार याचिका को किया खारिज

भारतीय सेना में लागू वन रैंक वन पेंशन (One Rank One Pension) पर पुर्नविचार को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. पूर्व सैनिकों की संस्था ‘इंडियन एक्स-सर्विसमेन मूवमेंट’ ने सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर पुर्नविचार की मांग की थी.
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भारतीय सेना में लागू वन रैंक वन पेंशन (One Rank One Pension) पर पुर्नविचार को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. पूर्व सैनिकों की संस्था ‘इंडियन एक्स-सर्विसमेन मूवमेंट’ ने सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर पुर्नविचार की मांग की थी. लेकिन जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रमनाथ की बेंच ने पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया. बता दें कि इसी साल 16 मार्च को सशस्त्र बलों में वन रैंक वन पेंशन (OROP) मामले में केंद्र को बड़ी राहत मिली थी. सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा बलों में “वन रैंक वन पेंशन” योजना शुरू करने के तरीके को बरकरार रखा था.

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हमें OROP के अपनाए गए सिद्धांत में कोई संवैधानिक खामी नहीं दिखी. कोई विधायी जनादेश नहीं है कि समान रैंक वाले पेंशनभोगियों को समान पेंशन दी जानी चाहिए. सरकार ने एक नीतिगत फैसला लिया है, जो उसकी शक्तियों के दायरे में है. एक जुलाई, 2019 से पेंशन फिर से तय की जाएगी और पांच साल बाद संशोधित की जाएगी. तीन माह के अंदर बकाया भुगतान करना होगा.

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(One Rank One Pension) दरअसल, एक्स-सर्विसमैन (पूर्व सैन्य कर्मियों) के इस संगठन की दलील थी कि समान समयावधि के कार्यकाल के साथ समान रैंक पर रिटायर होने वाले सैन्य कर्मियों के लिए एक यूनिफॉर्म पेंशन होनी चाहिए. इस मामले में सरकार और पूर्व सैन्य कर्मियों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की उस नीति को स्वीकार कर लिया था, जिसमें सरकार ने पेंशन के संशोधन के लिए 2013  को कट-ऑफ डेट बनाने की बात कही थी.

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(One Rank One Pension) इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक्स-सर्विसमेन एसोसिएशन ने दलील दी थी कि इससे उन सैन्य कर्मियों को कम पेंशन मिलेगी जो 2013 से पहले रिटायर होंगे, जबकि जो लोग 2013 के बाद रिटायर होंगे उन्हें अधिक पेंशन मिलेगी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने से मना कर दिया है और इस संबंध में दाखिल रिव्यू पेटिशन को खारिज कर दिया है.

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