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स्पेशल ट्रेनों से सफर करने के बाद भी प्रवासी धक्के खाने को मजबूर हैं. ट्रेनों के जरिए लोग एक शहर से दूसरे शहर तो आसानी से पहुंच जा रहे हैं, लेकिन असल जंग है स्टेशन से अपने घरों तक पहुंचने की. स्टेशन से आगे के सफर के लिए न टैक्सी है, न बस, न मेट्रो. जो मिल रहे हैं, वो मुंहमांगे दाम मांग रहे हैं.

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दरअसल, 12 मई से खुशियों की ट्रेन पटरियों पर दौड़नी शुरू हो गई, लेकिन सड़कों पर समस्या जस की तस बनी हुई है. ट्रेन के जरिए दिल्ली पहुंचे लोगों ने राहत की सांस तो ली, लेकिन रेलवे स्टेशन से घर जाना एक बड़ी समस्या बन गया. रेलवे स्टेशन के बाहर ना ऑटो हैं और ना ही गाड़ियां. लोगों को अपने घर जाने का साधन नहीं मिल रहा है.

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हरियाणा-यूपी जाने वालों की बढ़ी टेंशन

समस्या सिर्फ दिल्ली की नहीं हैं. एनसीआर में आने वाले लोग भी नई दिल्ली स्टेशन आते हैं. ऐसे में हरियाणा और उत्तर प्रदेश की गाड़ियों का दिल्ली के लिए परमिट मिलना भी एक चुनौती है, जिसने स्टेशन पर खड़े लोगों की टेंशन बढ़ा रखी है. दिल्ली सरकार की ओर से बसें चलाई जा रही हैं, लेकिन वह लोगों को बॉर्डर पर ही छोड़ रही हैं. फिलहाल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश दोनों राज्य सरकारों की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है.

जब टैक्सी या गाड़ी नहीं तो ई-पास का क्या काम?

सरकार की तरफ से ये कहा गया था कि यात्रियों का ई-टिकट ही उनका कर्फ्यू पास होगा, लेकिन तब ये नहीं बताया गया था कि जब स्टेशन से टैक्सी नहीं मिलेगी और परिवार या रिश्तेदार गाड़ी लेकर स्टेशन तक नहीं पहुंच पाएंगे तो ये टिकट वाला कर्फ्यू पास दिखाएंगे किसे?