ओबीसी आरक्षण को लेकर मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के संकेत,अब निर्वाचन आयोग तय करेगा कि चुनाव की प्रक्रिया

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    मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर पंचायत चुनाव टलने के संकेत मिलना तेज होगए हैं ऐसे कयास लगाए जा रहें हैं कि अब आगे का रास्ता राज्य निर्वाचन आयोग तय करेगा गुरुवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में सर्वसम्मति से अशासकीय संकल्प पारित किया है कि मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के बिना न हों। जिसके बाद सरकार अब विधानसभा का यह संकल्प राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेगी। मतलब साफ है कि आगे का रास्ता आयोग तय करेगा कि चुनाव की प्रक्रिया जारी रहेगी या फिर इसे टाला जाएगा? हालांकि विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. गिरीश गौतम ने पंचायत चुनाव फिलहाल टलने के संकेत दिए हैं।

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    उन्होंने बताया कि विधानसभा से सर्वसम्मति से जो संकल्प पारित हुआ है,उसे सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। एक तरह से यह चुनाव प्रक्रिया को रोकने के लिए सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट है। जिसके माध्यम से बताया जाएगा कि सदन का यह स्पष्ट मत है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के बिना ना हों। सुप्रीम कोर्ट में भी इसे सरकार बतौर सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट प्रस्तुत कर सकती है। आयोग अभी इंतजार में है कि सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार याचिका पर क्या फैसला देता है।

    विधानसभा के शीतकालीन सत्र का गुरुवार को चौथा दिन है। सुबह 11 बजे सदन में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने पंचायत चुनाव का मुद्दा उठाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने कहा कि पंचायत चुनाव को लेकर सरकार कुछ नहीं कर रही है। एक तरफ चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, दूसरी ओर कोर्ट में जाने की बात कही जा रही है। नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि हम चाहते हैं चुनाव को तत्काल रोका जाए।.

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    दोपहर 12 बजे के बाद सदन की कार्यवाही पुन: शुरू होने पर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी बात रखी। विधानसभा में सदन के नेता के तौर पर शिवराज ने कहा कि हम चाहते हैं कि बिना ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव ना कराए जाएं। सभी सदस्यों ने हाथ उठाकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के बिना चुनाव को लेकर आक्रोश है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सदन सर्वसम्मति से संकल्प पारित करके यह ऐतिहासिक फैसला करे कि पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ ही हों।

    इस पर नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि हम तो यही कह रहे थे कि सदन से संकल्प पारित किया जाए। हालांकि संकल्प प्रस्तुति के दौरान सदन में हंगामा भी हुआ। जब मुख्यमंत्री बोल रहे थे, तब विपक्ष के सदस्यों द्वारा हंगामा किया गया जिसको लेकर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि जब हमारे नेता को नहीं सुना जाएगा तो हम भी विपक्ष को बोलने नहीं देंगे।

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    इसके बाद अध्यक्ष ने संकल्प प्रस्तुत करवाया। संकल्प पारित होने के बाद जब नेता प्रतिपक्ष अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि संकल्प पारित होने के बाद उस पर नियम अनुसार चर्चा नहीं होती है। इस पर कांग्रेस के विधायकों ने पुन: हंगामा करना शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री संकल्प पारित होने के बाद सदन से निकल गए। इस दौरान अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करना पड़ी।

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