सेक्स स्कैंडल “हनी ट्रैप” का मामला 4 साल बाद एक बार फिर चर्चा में 29 जनवरी को इंदौर कोर्ट में सुनवाई

सेक्स स्कैंडल “हनी ट्रैप” का मामला 4 साल बाद एक बार फिर चर्चा में 29 जनवरी को इंदौर कोर्ट में सुनवाई

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हनी ट्रैप मामले में एसआईटी की कमान संभालने के बाद कटियार का पहला टेस्ट 29 जनवरी को इंदौर कोर्ट में होगा। इस दिन हनी ट्रैप मामले की सुनवाई होनी है।

मध्य प्रदेश का सबसे चर्चित सेक्स स्कैंडल “हनी ट्रैप” का मामला 4 साल बाद एक बार फिर चर्चा में है जिसका मुख्य कारण सरकार द्वारा एसआईटी के आदर्श कटियार को नियुक्त करना बताया जा रहा है आपको बता दें कटिहार इससे पहले इंटेलिजेंस में एडीजी रह चुके हैं इसके साथ ही इन्हें बिना किसी के दबाव में आए निष्पक्षता से काम करने के लिए जाना जाता है आदर्श कटियार साफ सुथरी छवि के अधिकारी माने जाते हैं आपको बता दें हनी ट्रैप मामले में एसआईटी की कमान संभालने के बाद कटियार का पहला टेस्ट 29 जनवरी को इंदौर कोर्ट में होगा। इस दिन हनी ट्रैप मामले की सुनवाई होनी है।

हनी ट्रैप मामले का खुलासा सितंबर 2019 को तब हुआ था, जब प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार थी। इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन ने पलासिया थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि अश्लील वीडियो भेजकर उनसे 3 करोड़ रुपए मांगे जा रहे हैं।

एक हफ्ते बाद भोपाल में दूसरा केस दर्ज

24 सितंबर 2019 को मानव तस्करी के दूसरे केस में भोपाल के सीआईडी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें पीड़िता ने बताया था कि आरोपी महिलाओं ने उसे रसूखदार लोगों के पास भेजकर उनके आपत्तिजनक वीडियो बनवाए। इन वीडियो के बदले उन लोगों को ब्लैकमेल कर उनसे वसूली की गई। पीड़िता ने कई अफसरों व प्रभावशाली लोगों के नाम भी पुलिस को बताए थे। इसी आधार पर ये एफआईआर दर्ज की गई थी। इंदौर और भोपाल कोर्ट में बीते 4 सालों से इस केस की सुनवाई चल रही है।

दोनों केस का क्या स्टेटस…

मानव तस्करी केस में सीडीआर के लिए टेलीकॉम अधिकारी की गवाही

इस मामले में 16 लोगों की गवाही हो चुकी है। एसआईटी ने जनवरी महीने में हुई पेशी में कहा था कि वे टेलीकॉम अधिकारी की गवाही कराना चाहते हैं, ताकि ये प्रमाणित हो सके कि फरियादी की किन लोगों से बात हुई। आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि सरकारी पक्ष ने टेलीकॉम अधिकारी की गवाही 3 साल में क्यों नहीं कराई?

इस केस में दिलचस्प बात ये है कि पीड़िता ने पहले कोर्ट को दिए बयान में ये कबूल किया था कि उसे जबरन कुछ लोगों के पास भेजा गया। इसके बदले उसे पैसे मिले थे। लेकिन प्रति-परीक्षण में पीड़िता ने आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया। फरवरी महीने में इस मामले की अगली सुनवाई होगी।

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29 जनवरी को इंदौर कोर्ट में पेशी, सरकार को देना है जवाब

हनीट्रैप केस में 29 जनवरी को इंदौर कोर्ट में पेशी होने वाली है। इस पेशी में सरकार को जवाब देना है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को जो नोटिस भेजा था, उस पर क्या एक्शन हुआ ? दरअसल, कमलनाथ ने 21 मई 2021 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से कहा था कि उनके पास हनी ट्रैप की पूरी सीडी और पेन ड्राइव है। इस पर आरोपियों के वकील यावर खान ने आपत्ति लगाकर पूछा था कि ये पेन ड्राइव कमलनाथ के पास कैसे पहुंची? इस पर एसआईटी के इंस्पेक्टर शशिकांत चौरसिया ने कोर्ट को दिए अपने बयान में कहा था कि वो पेन ड्राइव हासिल करने के लिए कमलनाथ को नोटिस दिया गया है।

नवंबर 2023 में एसआईटी ने अपने जवाब में कहा था कि एसआईटी चीफ विपिन माहेश्वरी रिटायर हो चुके हैं, नए चीफ बनने के बाद ही इस पर जवाब दाखिल किया जाएगा। अब 29 जनवरी को होने वाली सुनवाई में एसआईटी को जवाब देना है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास पेन ड्राइव कैसे पहुंची? क्या वो पेन ड्राइव उनसे ली गई? नोटिस मिलने के बाद कमलनाथ ने नया बयान दिया था उन्होंने सिर्फ 29 सेकेंड की क्लिप देखी है।

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इसके अलावा मूल केस में अब आरोपों पर बहस होनी बाकी है। यानी सरकारी पक्ष ये तर्क रखेगा कि अब तक की जांच में आरोपियों के खिलाफ जो सबूत मिले हैं, उस आधार पर उनके खिलाफ केस चलाया जाए। इसके बाद केस की सुनवाई शुरू होगी।

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अब समझते हैं एसआईटी के सामने क्या चुनौती…

अरुण निगम, हरीश खरे और भाजपा नेता त्रिवेदी का रोल बताना

मानव तस्करी केस में पीड़िता ने अरुण निगम, हरीश खरे सहित छतरपुर के स्थानीय नेता मनोज त्रिवेदी, चुलबुल पाण्डे और टिल्लू और जयपुर के राजेश गंगेले का नाम लिया था। अरुण निगम कांग्रेस सरकार में खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल के विशेष सहायक थे। पीड़िता ने अपने बयान में बताया था कि अरुण निगम के भी वीडियो बने हैं, लेकिन एसआईटी ने इन बिन्दुओं की जांच में क्या पाया, ये सामने ही नहीं आया।

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सीनियर ब्यूरोक्रेट्स और नेताओं के नाम उजागर करना

ब्यूरोक्रेट्स और नेताओं के वीडियो क्लिप बाहर आने के बाद एसआईटी ने इस मामले में नाम कभी उजागर नहीं किए। तत्कालीन एसआईटी चीफ ने स्वीकार किया था कि उच्चतम वेतनमान वाले आईएएस और आईपीएस के अलावा भाजपा-कांग्रेस के अनेक नेता भी आरोपी महिलाओं के बेहद नजदीक थे। लेकिन उनके नाम दस्तावेजों पर नहीं लिए गए। भाजपा सरकार के एक पूर्व मंत्री और सीएम के नजदीकी सीनियर आईएएस अधिकारी के ऑडियो – वीडियो तो मीडिया में भी आ चुके थे।

आरोपियों के एनजीओ को कितना फंड मिला, इसकी जांच

हनी ट्रैप की आरोपी महिलाओं के एनजीओ को सीनियर ब्यूरोक्रेट्स ने कितना फायदा पहुंचाया, इसकी भी अब तक जांच नहीं हो पाई। मानव तस्करी केस की पीड़िता ने आरोपी के एनजीओ दृष्टि और जागृति का भी जिक्र किया था। इनके पास से अफसरों की मुहर भी बरामद हुई थी। तत्कालीन एसआईटी चीफ संजीव शमी ने कहा था कि ये जांच का विषय होगा कि अफसरों ने आरोपी महिलाओं के एनजीओ को किस तरह और कितना फायदा पहुंचाया था। यदि उनकी भूमिका पाई जाएगी तो उनके खिलाफ पद के दुरुपयोग और सरकारी धन के आवंटन में गड़बड़ी का केस दर्ज किया जाएगा।

ये तीनों बिंदु इसलिए भी अहम है क्योंकि एसआईटी ने कोर्ट में खुद कहा था कि अभी मामले में आगे जांच चल रही है। लेकिन 4 साल बाद भी एसआईटी ने नए नामों का खुलासा नहीं किया।

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हनीट्रैप की जांच पर सीएम खुद रखते रहे हैं नजर

कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के दौरान सितंबर 2019 में जब हनीट्रैप का खुलासा हुआ, तब मुख्य सचिव एसआर मोहंती थे। इस पूरे केस की हाई लेवल मॉनिटरिंग हुई। यही वजह थी कि इंदौर में ब्लैकमेलिंग की एफआईआर होने के बाद इसे एक संगठित अपराध मानते हुए भोपाल में आरोपियों के मकान में दबिश देने के लिए एटीएस को जिम्मा दिया गया था। एटीएस के पुलिस अधिकारियों ने ही उस समय आरोपी महिलाओं की गिरफ्तारी की थी और उनके घरों की तलाशी ली थी। इसमें हार्ड डिस्क और कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स मिले थे। इसमें आपत्तिजनक वीडियो भी मिले थे।

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मार्च 2020 में जब शिवराज सरकार आई तो हनीट्रैप की जांच धीमी हो गई। लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले कमलनाथ ने ये कहकर विपक्ष को सकते में डाल दिया था कि उनके पास हनीट्रैप की पूरी पैन ड्राइव है। दिसंबर 2024 में मोहन यादव नए मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने एसआईटी चीफ के तौर पर आदर्श कटियार को जिम्मेदारी दी। कटियार को इंदौर संभाग का प्रभारी भी बनाया गया था। कहा जा रहा है कि कटियार नए सिरे से पूरी केस डायरी का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि ये पता किया जा सके कि किसका क्या रोल रहा है? किसे जानबूझकर बचाने की कोशिश की गई है।

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सितंबर 2019 से नवंबर 2023 तक ये रहे एसआईटी चीफ

वर्मा का आदेश निरस्त होने के 24 घंटे के भीतर संजीव शमी को एसआईटी चीफ बनाया गया। शमी भी महज हफ्ते भर ही इस भूमिका में रहे। शमी के रहते जब ब्यूरोक्रेट्स और नेताओं के नाम बाहर आने लगे तो तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हफ्ते भर के भीतर उनसे एसआईटी की कमान वापस ले ली।

संजीव शमी के बाद उस वक्त कमलनाथ सरकार के भरोसेमंद अफसर राजेंद्र कुमार को जांच का जिम्मा मिला। केस के सबसे अहम पड़ाव में राजेंद्र कुमार ने ही इन्वेस्टिगेशन टीम को लीड किया। चार्जशीट भी इन्हीं के कार्यकाल में कोर्ट में पेश हुई। इसमें कहा गया कि आगे जांच चल रही है।

शिवराज सरकार बनने के बाद एसटीएफ के डीजी विपिन माहेश्वरी को एसआईटी चीफ बनाया गया। माहेश्वरी 3 साल तक इस भूमिका में रहे। लेकिन इस दौरान केस की जांच आगे नहीं बढ़ पाई। नवंबर 2023 में माहेश्वरी रिटायर हो गए।

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