संकट में शिवराज सरकार..मानवाधिकार आयोग ने जारी किया नोटिस

संकट में शिवराज सरकार..मानवाधिकार आयोग ने जारी किया नोटिस

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मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने शिवराज सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि कोरोना की तीसरी लहर आती है तो इससे निपटने के लिए क्या तैयारी की गई है? कोरोना महामारी के अलावा ब्लैक फंगस के इलाज को लेकर भी जानकारी देने को कहा गया है। यह नोटिस कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए दिया गया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नरेंद्र कुमार जैन ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को भेजे गए नोटिस में 6 बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। याचिका में इसके लिए 28 मई तक जवाब देने को कहा गया है। इस नोटिस में कोरोना के इलाज और मौतों की जानकारी के अलावा जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी रोकने के उपाय पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

याचिका में कहा गया कि कोविड-19 के साथ अब ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) के भी मामले सामने आने लगे हैं। इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे शहरों में इससे बड़ी संख्या में मरीज मर रहे हैं। प्रशासनिक व्यवस्थाएं कम पड़ रही हैं। जिसकी आड़ में अव्यवस्था फैलती जा रही है। चाहे वह चिकित्सा का क्षेत्र हो या फिर नागरिक आपूर्ति जैसा महत्वपूर्ण क्षेत्र, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स व नर्सेस की कमी, ऑक्सीजन और वेन्टीलेटर्स की कमी, दवाइयों की कमी की आड़ में नकली दवाईयों की सप्लाई जैसी कितनी ही समस्याओं से प्रदेश जूझ रहा है।

नकली दवाओं व इंजेक्शन की सप्लाई
तन्खा ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक व्यस्तता की आड़ में मानवता के दुश्मन तैयार हो गए है जिनका उद्देश्य सिर्फ मुनाफा कमाना है। प्रदेश में नकली दवाओं और इंजेक्शन की सप्लाई हो रही है। ऐसे में मानवाधिकार चुप कैसे बैठ सकता है? आज सिर्फ कोरोना और ब्लैक फंगस के मरीज ही नहीं, बल्कि दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का ख्याल रखना भी आवश्यक है।

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मरीजों को नहीं मिल रही दवाएं
याचिका में कहा गया कि प्रदेश में कई मरीजों को जरूरी दवाईयां नहीं मिल पा रही हैं। अस्पतालों में मरीजों को नकली इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। जिससे उनकी मौतें हो रही हैं। पता ही नहीं चल रहा कि मौत बीमारी से है या नकली दवाओं से? सरकार इसके कोई आंकड़े जारी नहीं कर रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी लगाए आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सरकार पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस से मरीज मर रहे हैं, लेकिन सरकार को फिक्र नहीं है। न ही सरकार ने कोई खास तैयारी की है। अब प्रदेश में ऑक्सीजन, रेमडेसिविर की कमी की तरह ही ब्लैक फंगस बीमारी में उपयोग में आने वाले आवश्यक इंजेक्शन की कमी से जनता रोजाना जूझ रही है। इसकी कमी के कारण मरीजों की जान जा रही है।

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मानव अधिकार आयोग के शिवराज सरकार से सवाल
1 – 9 से 18 मई तक हर दिन जिलेवार कोरोना और ब्लैक फंगस के कितने मरीज मिले। इलाज व दवाओं के अभाव में कितने मरीजों की मौत हुई?
2- इन बीमारियों के उपयोग में आने वाली दवाईयों एवं इंजेक्शन की उपलब्धता के लिए क्या प्रयास किए गए हैं?
3- इन बीमारियों की उपयोग में आने वाली दवाईयों/इंजेक्शन की कालाबाजारी के संबंध में कितनी FIR किन धाराओं में की गईं?
4 – दवाओं व इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने हेतु क्या-क्या उपाय किए जा रहे हैं ?
5 – हर जिले में सरकारी एवं निजी अस्पतालों में कितने बेड उपलब्ध हैं?
6 – कोरोना महामारी की यदि तीसरी लहर आती है,तो क्या व्यवस्थाएं की जा रही है?

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