इस बार रूप चतुर्दशी पर अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए दीपदान और अभ्यंग स्नान अलग-अलग दिन हस्त नक्षत्र में किया जाएगा। इस मौके पर भगवान कृष्ण और यमराज का पूजन भी होगा। ज्योतिर्विदों के मुताबिक छोटी दीपावली और नरक चतुर्दशी के मौके पर घर आंगन में 14 दीपक लगाने का विशेष महत्व है।

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ज्योतिर्विद् पं. ओम वशिष्ठ के अनुसार चतुर्दशी इस वर्ष शनिवार को दोपहर 3.47 बजे लगेगी जो अगले दिन रविवार दोपहर 12.47 बजे तक रहेगी।

शनिवार रात 8.27 बजे से हस्त नक्षत्र लगेगा जो अगले दिन रविवार को शाम 5.48 बजे तक रहेगा। रूप चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान का महत्व सूर्योदय से पहले है, इसलिए यह लक्ष्मी पूजन वाले दिन 27 अक्टूबर को सुबह होगा। जबकि, दीपदान प्रदोष वेला में किया जाता है इसलिए दीपदान 26 अक्टूबर को किया जाएगा।

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मिलती है पापों से मुक्ति, सौंदर्य प्रदान करने वाला दिन

ज्योतिर्विद् पं. विजय अड़ीचवाल के अनुसार रूप चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी और यम चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन यम पूजन किया जाता है और 14 दीपक जलाए जाते हैं। माना जाता है कि यम पूजन और दीपदान से अकाल मृत्यु या नरक में जाने का भय समाप्त होता है। रूप चतुदर्शी को सौंदर्य में वृद्धि करने वाला दिन माना गया है। इस दिन सूर्योदय से पहले तेल-उबटन से स्नान करने का विशेष महत्व है। इसके साथ ही सौंदर्य वृद्धि के लिए भगवान कृष्ण का पूजन किया जाता है।

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सुबह से करें ये काम

रूप चौदस के दिन प्रात: काल शरीर पर उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। चिचड़ी की पत्तियों को जल में डालकर स्नान करने से स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। पूजन के लिए एक थाल को सजाकर एक चौमुख दिया जलाते हैं और ईष्ट देव की पूजा करें। पूजा के पश्चात सभी दीयों को घर के अलग अलग स्थानों पर रख दें तथा गणेश एवं लक्ष्मी के आगे धूप दीप जलाएं। इसके बाद शाम को दीपदान करते हैं और दक्षिण दिशा की ओर चौदह दिए जलाए जाते हैं, जो यम देवता के लिए होते हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर सभी पापों से मुक्ती मिलती है।

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