रेलवे
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रेल मंडल के भोपाल व हबीबगंज स्टेशन से चलने वाली कुछ ट्रेनें घाटे में चलती हैं, वहीं कुछ लगातार फायदा पहुंचाती रहती हैं। आम यात्रियों के हित में रेलवे को घाटा पहुंचाने वाली ट्रेनों को लगातार चलाना पड़ता है। वहीं, फायदा देने वाली ट्रेनों से मिलने वाले पैसे का उपयोग घाटा पहुंचाने वाली गाड़ियों को चलाने में भी करना पड़ता है। रेल मंडल की समीक्षा में यह खुलासा हुआ है कि भोपाल और हबीबगंज स्टेशन से शुरू होने वालीं कौनसी ट्रेनें फायदे में हैं और कौनसी घाटे में चल रही हैं।

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टिकट संख्या के आधार पर यह बात साबित होती है कि आम दिनों में यह ट्रेनें कितने फीसदी फायदे और कितने प्रतिशत घाटे में चलाई जाती हैं। हालांकि रेल अधिकारी इस मामले में खुलकर कुछ भी बोलने तैयार नहीं हैं। हाल ही में रेलवे ने देश के विभिन्न रेल मंडलों से चलने वाली 500 से ज्यादा ट्रेनों को घाटा पहुंचाने के चलते बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। रेलवे भी अब अन्य व्यावसायिक संगठनों की तरह ही घाटा पहुंचाने वाली ट्रेनों को बंद करने या पहले चरण में कुछ फेरे भी कम कर चलाने की संभावना तलाश रहा है।

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रेल अधिकारियों का कहना है कि अचानक किसी भी ट्रेन को बंद कर देने से आम लोगों में रेलवे की छवि खराब होने व अचानक आवागमन का साधन छिन जाने का मैसेज जाएगा और विरोध भी शुरू हो सकता है। इसी को देखते हुए रेलवे द्वारा सबसे पहले ज्यादा घाटा पहुंचाने वाली ट्रेनों के फेरों में दो से लेकर तीन तक की कमी की जाएगी। उसके बाद तीन से चार महीने आंकलन किया जाएगा और फिर भी ज्यादा घाटा होने पर उन्हें साल के अंत तक बंद कर अन्य डिमांड वाले रूट पर चलाया जा सकता है।

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