नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार देर रात करीब एक हफ्ते के अमेरिका दौरे पर रवाना होंगे. लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर सत्ता में लौटे पीएम मोदी की दूसरी पारी में यह पहली अमेरिका यात्रा है. प्रधानमंत्री के तौर पर इस सबसे लंबे अमेरिका प्रवास में मोदी जहां वैश्विक नेता के बदले अवतार में नजर आएंगे. वहीं दुनिया के एजेंडा का रुख तय करने वाले नए भारत की दमदार आवाज को भी रखते दिखाई देंगे. अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोदी की बदले कूटनीतिक बानगी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के हाशिए पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के करीब दो दर्जन नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात होनी है.

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तीन दिन में दो बार मिलेंगे मोदी ट्रंप

अमेरिका में मोदी की मौजूदगी के नए दबदबे का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनसे महज तीन दिनों में दो बार मुलाकात करेंगे. मोदी और ट्रंप जहां 22 सितंबर को भारतीय-अमेरिकी समुदाय द्वारा आयोजित हाऊडी मोदी के मंच पर एक साथ नजर आएंगे. वहीं 24 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप भारतीय प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय मुलाकात भी करेंगे. तीन महीनों के दौरान यह चौथा मौका होगा जब दोनों नेता मिल रहे होंगे.

विदेश सचिव विजय गोखले के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा भारत की व्यापक और वैश्विक प्रतिबद्धताओं का प्रतिबिंब कही जा सकती है. पीएम मोदी अपने सात दिनी दौरे में संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाशिए पर बहुपक्षीय संपर्क का हिस्सा बनेंगे. वहीं राजनीतिक हस्तियों, कारोबार जगत और भारतीय समुदाय के साथ द्विपक्षीय संवाद करेंगे. साथ ही दुनिया के नेताओं के साथ उनकी आपसी-मुलाकातें भी होनी हैं.

ऊर्जा बाजार संकट के बीच अमेरिकी भरोसा जुटाने की कोशिश

सितंबर 21 की दोपहर अमेरिका पहुंचने पर पीएम मोदी का पहला पड़ाव ह्यूस्टन शहर होगा. हालांकि सफर की थकान मिटाने की बजाए पीएम कुछ ही देर बाद अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों के सीईओ स्तर अधिकारियों के साथ बैठक की गोलमेज पर नजर आएंगे. भारत इन अमेरिकी कंपनियों से करीब 4 अरब डॉलर से अधिक का तेल और गैस आयात कर रहा है. ऐसे में जबकि खाड़ी मुल्कों में बढ़े तनाव के कारण जहां ऊर्जा बाजार में संकट गहराया है, भारत जैसे बड़े तेल आयातक मुल्क के लिए भी चिंताएं बढ़ी हैं. अपनी जरूरत का 80 फीसद तेल व गैस आयात करने वाला भारत अपने विकल्पों के लिए निश्चंतता तलाश रहा है जिसमें अमेरिका उसका भरोसेमंद साथी हो सकता है. विदेश सचिव के मुताबिक ऊर्जा कंपनियों के साथ पीएम मोदी इस संवाद में भारत नए निवेश की संभावनाओं को भी तलाशेगा.

हाऊडी मोदी में शामिल होगा अमेरिका का पक्ष और विपक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरा का एक बड़ा आकर्षण है ह्यूस्टन शहर के एनआरजी स्टेडियम में रविवार को होने वाला हाऊडी मोदी कार्यक्रम. यह अमेरिका में पीएम मोदी का अब तक का सबसे बड़ा डायस्पोरा संवाद कार्यक्रम है. इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शरीक होंगे. किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की अगवानी के लिए हो रहा अमेरिकी इतिहास का यह सबसे बड़ा आयोजन है. ह्यूस्टन में आयोजित ‘हाऊडी मोदी’ के लिए 50 हज़ार से ज़्यादा लोग पहुंचेंगे. ऐसा पहली बार होगा कि अमेरिकी धरती पर राष्ट्रपति औऱ भारतीय प्रधानमंत्री की मुलाकात न्यूयॉर्क या वाशिंगटन से बाहर होगी और दोनों किसी जनसभा को साथ संबोधित करेंगे.

इस कार्यक्रम में केवल राष्ट्रपति ट्रंप ही नहीं बल्कि उनकी विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं समेत कई कांग्रेस सदस्य भी शरीक होंगे. विदेश सचिव के मुताबिक इस तरह के आयोजन में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी जहां भारतीय-अमेरिकी समुदाय की सकारात्मक छवि का असर दिखाती है वहीं यह भी दर्शाती है कि भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर वरिष्ठ अमेरिकी नेतृत्व में एक राय है. गोखले ने बताया कि आयोजन के बाद पीएम मोदी अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों के साथ अलग से संवाद-मुलाकात भी करेंगे.

जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की रणनीतिक में अगुवाई को तैयार भारत

ह्यूस्टन के बाद यात्रा के अगले चरण में पीएम 22 तारीख की शाम को न्यूयॉर्क पहुंचेंगे. अगले दिन वो संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा आयोजित जलवायु-परिवर्तन शिखर सम्मेलन में शरीक होंगे. इस दौरान जहां पीएम जलवायु परिवर्तन की चुनौती के खिलाफ अपनी सरकार की कोशिशों का रिपोर्टकार्ड पेश करेंगे वहीं समाधान के मोर्चे पर भारत जैसे विकासशील देशों की अपेक्षाएं भी सामने रखेंगे.

विदेश सचिव के अनुसार भारत सभी बहुपक्षीय मंचों पर सतत विकास लक्ष्यों के खाते में स्वच्छता से लेकर स्वास्थ्य तक अफनी उपलब्धियों के साथ शरीक होगा. इतना ही नहीं इन लक्ष्यों को पूरा करने व वैश्विक एजेंडा को तय करने में अपनी अपेक्षित भूमिका को भी सक्रियता से निभाने की तैयारी के साथ पहुंचेगा.

यूएन के मंच से ही पीएम सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे. दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य कल्याण योजना आयुष्मान भारत उनके भाषण का केंद्र होगी.

सीडीआरआई का भी आगाज करेगा भारत

जलवायु परिवर्तन की चुनौती से मुकाबले औऱ प्राकृतिक आपदाओं की विभीषिका से निपटने की तैयारियों के लिए भारत एक नए वैश्विक प्रयास का भी ऐलान करने जा रहा है. कोएलिशन एगेंस्ट डिजास्टर रिजिलियंट इंफ्रास्ट्रक्चर नामक इस प्रयास को भी न्यूयॉर्क में पीएम मोदी के यात्रा के दौरान लांच किया जाएगा. भारत की पहल पर बन रहा यह एक वर्चुअल नेटवर्क होगा जिसमें प्राकृतिक आपदा से निपटने के उपायों पर विशेषज्ञता रखने वाले पेशेवर और संस्थाओं को एक परचम तले लाया जा सकेगा. पीएम ने इस प्रयास का प्रस्ताव सबसे पहले जापान के ओसाका में बीते दिनों हुआ जी-20 बैठक के दौरान रखा था. इसमें जापान, फ्रांस समेत कई देशों ने भारत के प्रयासों को सहयोग देने का वादा किया है.

प्रशांत महासागर के द्वीप देशों और कैरेबियाई मुल्कों के नेताओं संग होने वाली बैठक में पीएम मोदी की कोशिश भारत के इस वैश्विक प्रयास के लिए नई जड़ें तलाशने की होगी. जाहिर है जलवायु परिवर्तन की चुनौती के कारण अस्तित्व का खतरा झेल रहे द्वीप देशों को इस तरह के नेटवर्क की जरूरत भी सबसे ज्यादा है. इंटरनेशनल सोलर अलायंस के बाद सीडीआरआई दूसरा ऐसा वैश्विक प्रयास है जिसकी अगुवाई भारत कर रहा है.

गांधी के नाम से जगमगाएगा यूएन मुख्यालय

पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन के लिए हो रहे अपने इस दौरे में 24 सितंबर को यूएन इमारत को सोलर रौशनी की सौगात भी देंगे. भारत ने दस लाख डॉलर की मदद के साथ संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की छत पर 193 सोलल पैनल स्थापित किए हैं. इसे गांधी सोलर पार्क का नाम दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैय्यद अकबरूद्दीन के मुताबिक एक पैनल यूएन के एक सदस्य देश का प्रतीक है. भारत ने यहां भी बराबरी के सिध्दांत का ध्यान रखा है. महत्वपूर्ण है कि भारत ने 2018 में विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासभा सचिवालय के साथ मिलकर नवीकरणीय उर्जा को बढ़ावा देने के लिए सहयोग का वादा किया था.

गांधी सोलर पार्क के साथ ही 24 सितंबर की दोपहर पीएम मोदी न्यूयॉर्क स्टेट यूनिवर्सिटी में लगाए गए 150 पेड़ों वाले गांधी पीस पार्क का भी उद्घाटन करेंगे. महात्मा गांधी की 150वीं जयंति को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देते हुए पीएम मोदी एक बैठक भी आयोजित करेंगे जिसका विषय होगा नेतृत्व और मौजूदा समय में गांधी की प्रासंगिकता. इस कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति, न्यूजीलैंड व बांग्लादेश की प्रधानमंत्री समेत कई शासनाध्यक्ष भी शामिल होंगे. गांधी जयंति से पहले संयुक्त राष्ट्र संघ में हो रहे इस आयोजन में महात्मा गांधी पर विशेष यूएन डाक टिकट भी जारी किए जाएंगे.

आतंकवाद के मुद्दे पर बात जरूर होगी

संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाशिए पर पीएम मोदी आतंकवाद और चरमपंथी विचारों का प्रचार-प्रसार रोकने की रणनीति पर आयोजित बैठक को भी संबोधित करते नजर आएंगे. जॉर्डन किंग अबदुल्लाह, फ्रेंच राष्ट्रपति इमानुअल मैक्रों न्यूजीलैंड के पीएम जैसिंडा अर्डेर्न तथा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतरेज की संयुक्त मेजबानी में 23 सितंबर को आयोजित इस बैठक में मोदी को चुनिंदा वक्ता के तौर पर बुलाया गया है. उनके अलावा जर्मनी की चांसलर एजेंला मार्केल भी बैठक को संबोधित करेंगी.

पीएम मोदी के संयुक्त राष्ट्र संबोधन में पाकिस्तान के नाम का जोर-शोक से जिक्र भले ही ना आए लेकिन सीमा-पार आतंकवाद की करतूतों और इस वैश्विक बीमारी से निपटने की साझा जरूर का उल्लेख जरूर नजर आने की उम्मीद है.

हालांकि विदेश मंत्रालय अधिकारियों के अनुसार आतंकवाद का मुद्दा पीएम के भाषण या वार्ताओं का केंद्र नहीं है. यूएन महासभा में पीएम भारत की वैश्विक भूमिका और दुनिया के विकास एजेंडा की दिशा तय करने में योगदान पर बात करने की तैयारी के साथ जा रहे हैं.

मोदी के यूएन भाषण में अनुच्छेद 370 नहीं होगी कोई बात

भारत ने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएन भाषण में जम्मू-कश्मीर या अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के फैसले का कोई जिक्र नहीं होगा. विदेश सचिव के मुताबिक यह फैसला भारत का अंदरूनी मामला है. लिहाजा इस मुद्दे पर पीएम यूएन में कोई बात नहीं करेंगे.

यूएन सुधार की पुरजोर वकालत भी होगी पीएम की प्राथमिकता

दुनिया का सात फीसद आबादी का घर कहलाने वाले भारत के नेता के तौर पर यूएन को संबोधित करने पहुंच रहे पीएम मोदी के एजेंडा में यूएन सुधार का मुद्दा भी अहम होगा. विदेश मंत्रालय अधिकारियों को मुताबिक भारत लगातार यह मांग करता आया है कि संयुक्त राष्ट्र संघ का स्वरूप बदले वक्त की ज़मीनी हकीकत के अनुरूप होना चाहिए. विदेश सचिव के मुताबिक पीएम इस मत के पैरोकार हैं कि स्थिरता के लिए बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था ही केंद्र है. हालांकि यह व्यवस्था दुनिया की वर्तमान वास्तविकता के मुताबिक होनी चाहिए. वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ के गठन के बाद आजाद हुए कई देश आज दुनिया में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. विजय गोखले ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अपनी द्विपक्षीय औऱ बहुपक्षीय बैठकों में पीएम इस मुद्दे को भी सशक्त तौर पर उठाएंगे

@vicharodaya

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