ऐसे ग्रामीण थाने जिनमें आधा शहर और आधा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों का आता है, वे थाने भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम के अंतर्गत ही आएंगे।

पुलिस कमिश्नर सिस्टम का ड्राफ्ट फाइनल आज सीएम के साथ हो सकती है चर्चा
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पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लेकर गृह विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। बुधवार को गृह विभाग के अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर के अधिकारों और उनके प्रभाव के साथ डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (डीएम यानि कलेक्टर) के अधिकारों को स्पष्ट करके प्रारूप को तकरीबन फाइनल कर दिया। मुख्यमंत्री से इस बारे में बुधवार को ही चर्चा होनी थी, लेकिन अब यह चर्चा गुरुवार को संभावित है।

इस बीच गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने साफ कर दिया कि भोपाल-इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम नवंबर के अंत तक लागू कर दिया जाएगा। विधि विभाग और वित्त की अनुमति का इंतजार है। गृहमंत्री ने यह भी बताया कि इस सिस्टम में दोनों बड़े शहरों के तमाम थाने आएंगे। इसके अतिरिक्त ऐसे ग्रामीण थाने जिनमें आधा शहर और आधा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों का आता है, वे थाने भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम के अंतर्गत ही आएंगे।

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भूपेंद्र ने कहा- अच्छे परिणाम नहीं आए तो वापस लेंगे

नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि इंदौर और भोपाल में इस प्रणाली के परिणाम देेखेंगे कि अपराधों पर अंकुश लगता है या नहीं। अगर परिणाम ठीक आएंगे तो अन्य शहरों में भी लागू करेंगे। परिणाम ठीक न आने पर इंदौर और भोपाल से भी इसे वापस ले लिया जाएगा।

राज्य प्रशासनिक सेवा एसोसिएशन विरोध में

राज्य प्रशासनिक सेवा एसो. ने पुलिस कमिश्नर सिस्टम का विरोध कर दिया है। महासचिव मल्लिका निगम नागर ने कहा कि वर्तमान में ऐसी कोई स्थिति नहीं है कि पुलिस और प्रशासन में तालमेल में कोई कमी हो। एनएसए, जिलाबदर या इस तरह के अन्य मामले बातचीत से सुलझाए जाते हैं।

अगर कानून व्यवस्था में कोई अड़चन होती तो बात अलग थी। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर और आईएएस अफसरों से जिन अधिकारों को वापस लिए जाने की बात हो रही है, उस संबंध में उनसे कोई चर्चा नहीं की गई। संघ का प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री के समक्ष अपना पक्ष रखेगा।

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राजस्व अधिकारी संघ- एक पक्षीय निर्णय न्यायसंगत नहीं

मप्र राजस्व अधिकारी संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पुलिस कमिश्नर प्रणाली के एक पक्षीय लागू करने पर विरोध जताया है। प्रांताध्यक्ष नरेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि इस प्रणाली के लागू होने का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। आम जनता से जुड़ा यह फैसला होने के कारण अंतिम फैसला लिए जाने के पहले मंत्रिमंडल समूह, सचिव स्तरीय समूह, अधिवक्ता परिषद, जनप्रतिनिधियों तथा नागरिकों से विमर्श जरूरी है।

इतना महत्वपूर्ण निर्णय एक पक्षीय रूप से लिया जाना न्यायसंगत नहीं होगा। राजस्व अधिवक्ता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष धर्मेंद्र वाधवानी ने कहा कि पहले अधिवक्ता संघ से चर्चा की जानी चाहिए थी। इस तरह का फैसला सीधे नहीं लिया जाना चाहिए।

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