मध्यप्रदेश में अफसर की मनमानी: 13 साल बाद महिला को अपात्र बता नौकरी से निकाला,कई मंत्रियों के पत्रों को किया इग्नोर,अब दर-दर भटक रही महिला

मध्यप्रदेश में अफसर की मनमानी: 13 साल बाद महिला को अपात्र बता नौकरी से निकाला,कई मंत्रियों के पत्रों को किया इग्नोर,अब दर-दर भटक रही महिला

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अफसर ने महिला को 13 साल बाद अपात्र बताकर नौकरी से निकाला,कई मंत्रियों के पत्रों को किया इग्नोर नहीं हुआ हाजिर,अब दर-दर भटक रही महिला

मध्यप्रदेश में अफसर,अधिकारी मंत्रियों और प्रशासन के आदेशों का जिस हिसाब से पालन कर रहे है। यह कहना गलत नही होगा की प्रदेश में अफसरों की मनमानी चरम पर है,इसके परिणाम स्वरूप कई अधिकारियों और जिम्मेदारों को पिछले कुछ समय मे स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मंच से ही निलंबित कर दिया।

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ऐसे में अफसर की मनमानी का एक और मामला सामने आया है। मध्यप्रदेश के सीधी जिले से जहां कार्यपालन यंत्री  के रूप में पदस्थ डीके सिंह की मनमानी,एक महिला को इतनी भारी पड़ी की वह एक ही विभाग में 13 साल नोकरी करने के बाद अपात्र बता दी गई।

विभाग के तरफ से जारी पत्र व कार्यपालन यंत्री डीके सिंह को उपस्थित होने के आदेश।
विभाग के तरफ से जारी पत्र व कार्यपालन यंत्री डीके सिंह को उपस्थित होने के आदेश।

अब वह महिला अपना अधिकार पाने के लिए दर-दर की ठोकर खा रही है, जबकि अन्य दैनिक वेतन भोगी,जो महिला के साथ जॉइन हुए थे वह अभी भी स्थाई कर्मी के रूप में कार्यरत है.

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मध्यप्रदेश ओबीसी कर्मचारी संघ आया महिला के सपोर्ट में

मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग अधिकारी एवं कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष केपी कुर्मवंशी ने बताया कि सीधी जिले के लोकनिर्माण विभाग में कार्यरत महिला बतसिया देवी 13 साल से लगातार सेवायें दे रही थी,परन्तु महिला को अवैध नियुक्ति बताकर कैसे निकाला जा सकता है.?

मध्यप्रदेश पिछड़ावर्ग अधिकारी एवं कर्मचारी संघ आया महिला के समर्थन में।
मध्यप्रदेश पिछड़ावर्ग अधिकारी एवं कर्मचारी संघ आया महिला के समर्थन में।

जबकि बतसिया देवी के साथ जॉइन हुए दो अन्य कर्मी मनमोहन सिंह और राम भूषण  मिश्रा  अभी भी स्थायी कर्मी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं,यदि महिला (बतसिया देवी) अपात्र है,तो अन्य दो कर्मी पात्र कैसे.? और वहीं जब यह दोनों व्यक्ति पात्र हैं तो फिर महिला कैसे अपात्र हो सकती हैं.?

महिला को 13 साल की नौकरी के बाद निकाला,क्या है मामला.?

मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग अधिकारी एवं कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष केपी कुर्मवंशी ने बताया कि सीधी जिले के लोकनिर्माण विभाग में तीन दैनिक वेतन भोगियों को पत्र क्रमांक 7106 दिनांक 26.09.2003 को कार्य पर रखा गया था। जिनमें दैनिक वेतन भोगी मनमोहन सिंह, राम भूषण मिश्रा और बतसिया देवी को कार्य पर रखा था। जिसके बाद विभाग ने  बतसिया देवी की अवैध  भर्ती बताकर,13 साल बाद नौकरी से निकाल दिया गया।

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कई मंत्रियों के पत्रोंं को किया इग्नोर विभागीय कार्यवाही में नहीं हुए हाज़िर

विभागीय कार्यवाही के दौरान कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष केपी कुर्मवंशी ने बताया कि प्रदेश के मंत्रियों/विधायक कमलेश्वर पटेल,विधायक (सिहावल) सीधी, रामखेलावन पटेल राज्यमंत्री, सुरेश धाकड़ राज्यमंत्री लोक निर्माण ने निर्देश जारी करते हुए पत्र लिखें। जिसके लिए विभागीय जांच समिति भी गठित की गई लेकिन कमेटी के भी कई बार बुलाने पर कार्यपालन यंत्री डीके सिंह हाज़िर नही हुए न ही किसी कॉल का जवाब दिया।

मंत्री,विधायक और पूर्व सांसद द्वारा विभाग व जिम्मेदारों को पत्र जिसपर नही हुई कोई कार्यवाही
मंत्री,विधायक और पूर्व सांसद द्वारा विभाग व जिम्मेदारों को पत्र जिसपर नही हुई कोई कार्यवाही

अब लोकायुक्त की कायर्वाही में रिश्वत लेते रंगें हाथ पकड़ाया कार्यपालन यंत्री

लोकनिर्माण विभाग में कार्यपालन यंत्री डीके सिंह एक अन्य मामले में ठेकेदार से रोड,पुलिया इत्यादि के निर्माण में 20 लाख का बिल पास कराने के बदले में 2 प्रतिशत की दर से लगभग दो लाख रुपये की मांग की थी। जिसकी शिकायत लोकायुक्त एसपी गोपाल धाकड़ से की गई।

अब लोकायुक्त की कायर्वाही में रिश्वत लेते रंगों हाथ पकड़ाया कार्यपालन यंत्री
अब लोकायुक्त की कायर्वाही में रिश्वत लेते रंगों हाथ पकड़ाया कार्यपालन यंत्री

मामले को सत्यापित कराने के बाद एसपी धाकड़ ने इस्पेक्टर जिया-उल हक के नेतृत्व में लोकायुक्त की 12 सदस्यी टीम को भेजा गया था। जैसे ही कार्यपालन यंत्री डीके सिंह ने 50 हज़ार रुपये की रिश्वत ली वैसे ही लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथों दबोच लिया। आपकों बता दें सीधी,सिंगरौली सहित कई जिलों में डीके सिंह कार्यपालन यंत्री के रूप में सेवाएं दे चुका है। मिली जानकारी के मुताबिक कार्यपालन यंत्री सिंह को निलंबित कर दिया गया है।

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अब बतासिया को न्याय का इंतजार

अवैध भर्ती बताकर निकाली गई महिला बतसिया देवी को सिंह के स्थान पर आए। नए कार्यपालन यंत्री से न्याय की आस है। बतसिया ने बताया उनके पति के गुजर जाने के बाद परिवार में इकलौती कमाने वाली थीं। इस नौकरी पर वह पूरी तरह से निर्भर थी।

विभाग द्वारा जारी पत्र जिसमें 13 साल की नौकरी के बाद भर्ती और अवैध बताकर निकाला गया
विभाग द्वारा जारी पत्र जिसमें 13 साल की नौकरी के बाद भर्ती और अवैध बताकर निकाला गया

अब नौकरी के चले जाने से वह मजदूरी करके अपना गुजर-बसर करने को मजबूर है बतसिया देवी बताती हैं की जिस पत्र के आधार पर उन्हें नौकरी  मिली थी उसमें दो अन्य लोग शामिल थे लेकिन जब अवैध भर्ती बताकर निकाला गया तो केवल उसमें मेरा नाम था जबकि साथ में भर्ती हुए दो अन्य कर्मी अपनी सेवाएं आज भी दे रहे हैं।

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