विराट कोहली कप्तानी को लेकर काफी दबाव में हैं.

T20 World Cup 2021 में पहले मैच में पाकिस्तान से दस विकेट से मिली हार के बाद लगातार दूसरा मैच गंवाने से भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को करारा झटका लगा है

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कागजों पर दुनिया का सबसे मजबूत भारतीय बल्लेबाजी क्रम टी20 वर्ल्ड कप 2021 (T20 World Cup 2021) में लगातार दूसरे मैच में फ्लॉप रहा. पहले मैच में 151 रन बनाने के बाद दूसरे मुकाबले में केवल 110 रन बने. इससे न्यूजीलैंड के खिलाफ करो या मरो के मुकाबले में टीम इंडिया आठ विकेट से हारी. अब विराट कोहली (Virat Kohli)की टीम आईसीसी टी20 विश्व कप से बाहर होने की कगार पर पहुंच गई है. पहले मैच में पाकिस्तान से दस विकेट से मिली हार के बाद लगातार दूसरा मैच गंवाने से भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को करारा झटका लगा है. इसके साथ ही टी20 कप्तान कोहली की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं. कोहली इस टूर्नामेंट के बाद टी20 कप्तानी छोड़ रहे हैं लेकिन इस हार से वनडे कप्तान के तौर पर उनके भविष्य पर भी सवाल उठेंगे. भारत को 2023 में वर्ल्ड कप खेलना है. टी20 वर्ल्ड कप में निराशा के बाद क्या वे आगे कप्तान बने रहेंगे, इस पर आने वाले समय में कई बातें होंगी.

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टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की पहले मैच की हार जहां अपमानजनक थी तो न्यूजीलैंड से पराजय भी शर्मनाक रही. भारत के लिये अब सेमीफाइनल की राह इतनी कठिन हो गई है कि अफगानिस्तान अगर न्यूजीलैंड को हरा देता है तो वह भी दौड़ में बना रहेगा. वह भी तब जब भारत अफगानिस्तान, नामीबिया और स्कॉटलैंड तीनों को हरा दे, वह भी बड़े अंतर से. बेखौफ बल्लेबाजी टी20 क्रिकेट की पहली शर्त है और भारत के प्रदर्शन में वह कहीं नजर नहीं आई. इतने अहम मुकाबले में भारतीय टीम सात विकेट पर 110 रन ही बना सकी. मुकाबले के दौरान सात से 15 ओवर के दौरान एक बाउंड्री गई. भारत ने अपनी पारी में 54 डॉट बॉल खेली. यानी 20 ओवर के खेल में नौ ओवरों में एक भी रन नहीं बना.

इस टीम इंडिया की जगह तो सेमीफाइनल में नहीं बनती

चाहे कुछ भी कहा जाए लेकिन कोहली की टीम अभी जिस तरह की टी20 क्रिकेट खेल रही है उसके चलते सेमीफाइनल में जगह नहीं बन रही. न्यूजीलैंड ने टीम इंडिया सभी कमियों का पूरा फायदा उठाया. रही-सही कसर खराब शॉट सेलेक्शन ने पूरी कर दी. टी20 वर्ल्ड कप के बाद भारत के कई सीनियर खिलाड़ी शायद ही क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में खेलते हुए दिखाई दें. ऐसे में नए खिलाड़ियों को वो कसम पूरी करनी होगी जो पुराने खिलाड़ियों ने ले रखी थी यानी निडर होकर खेलना. टीम इंडिया पर अभी मर्फी का सिद्धांत लागू होता है जिसमें कहा गया था- अगर कुछ भी गलत होना है तो वह तब होगा जब समय सबसे खराब होगा.

ताकत ही बन गई कमजोरी

रोहित शर्मा और विराट कोहली की फॉर्म एक ही समय पर चली गई. मिडिल ऑर्डर की कमी अभी तक दूर नहीं हुई. हार्दिक पंड्या बल्लेबाज के रूप में लगातार फ्लॉप हो रहे हैं. लेकिन सबसे बड़ी चिंता है स्पिन को नहीं खेल पाना. कभी भारत की पहचान हुआ करती थी कि उसके बल्लेबाज स्पिन खेलने में उस्ताद थे लेकिन अब धीमी गेंदों के सामने उनके पैर ही नहीं चलते.  पाकिस्तान के खिलाफ भी स्पिन ने परेशान किया था. दूसरे मैच में न्यूजीलैंड के मिचेल सैंटनर ने चार ओवर फेंके और केवल 15 रन दिए. ईश सोढ़ी ने चार ओवर में 17 रन दिए और दो विकेट लिए.

चमत्कार को नमस्कार!

विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दो सबसे बड़े बल्लेबाज सोढ़ी की लेग स्पिन में उलझ गए. इसके उलट भारतीय स्पिनर्स एकदम बैरंग रहे. मिस्ट्री स्पिनर के रूप में आए वरुण चक्रवर्ती लगातार दूसरे मैच में नाकाम रहे. उन्हें कोई विकेट नहीं मिला. रवींद्र जडेजा के तो दो ओवरों में ही 23 रन चले गए. वे तो कीवी बल्लेबाजों को गिफ्ट में रन देते दिखे. बाकी तेज गेंदबाजों में केवल जसप्रीत बुमराह ही असर छोड़ पाए.

अब चमत्कार पर टीम इंडिया की उम्मीदें टिकी हैं. नामीबिया, स्कॉटलैंड और अफगानिस्तान के खिलाफ टीम कैसा खेलती है यह भविष्य के गर्भ में है. देखना होगा कि इन मैचों में कौनसी टीम इंडिया खेलती है.

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