मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के कलेक्टर ने कोरोना संक्रमितों के लिए एक तुगलकी आदेश जारी कर दिया। निवाड़ी शहर के चार वार्डो में कोरोना संक्रमितों के बाहर घूमने की शिकायत मिलने पर कलेक्टर आशीष भार्गव ने उनके घरों के बाहर ताला लगवा दिया। संक्रमितों को जरूरी सामग्री के लिए काफी परेशान होना पड़ा। कलेक्टर की यह कार्रवाई जब इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुई तो अगले दिन ताला खुलवा दिया गया। जिले में रोज 150 से 200 मरीज मिल रहे हैं। यहां भी कोरोना कफ्र्यू लगाया गया है।

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प्रशासन को सूचना मिली थी कि निवाड़ी के वार्ड पांच, छह, सात और 10 में बुधवार को 179 कोरोना संक्रमित मिले हैं और इनमें से कई लोग बाहर घूम रहे हैं। कलेक्टर ने इन वार्डो में कंटेनमेंट जोन बनाने या संक्रमितों के 22 घरों के बाहर बेरिकेड्स लगवाने के बजाय संक्रमितों के घरों के बाहर ताले लगवा दिए। 22 घरों में डलवाए ताले कलेक्टर के निर्देश पर मुख्य नगरपालिका अधिकारी आरएस अवस्थी, तहसीलदार अनिकेत चौरसिया के साथ पुलिस बल बुधवार को इन वार्डो में पहुंचा और संक्रमितों के 22 घरों में बाहर से ताला लगवा दिया। इस दौरान कई लोग गुहार लगाते रहे कि उन्हें जरूरी सामान की आवश्यकता है परंतु किसी ने उनकी बात नहीं सुनी।

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इसके बाद प्रभावित लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई को इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर मदद की गुहार लगाई। इससे प्रशासन पर दबाव बना और 24 घंटे बाद गुरवार को ताले खुलवा दिए गए। अधिवक्ता निखिल तिवारी का कहना है कि भारतीय संविधान में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी निजी स्वतंत्रता का अधिकार है। महामारी एक्ट में रोग के प्रसार को रोकने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा सकती है लेकिन ताले में बंद नहीं किया जा सकता।

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जो लोग कोरोना कफ्र्यू का पालन नहीं कर रहे थे, कलेक्टर के निर्देश पर उनमें से कुछ लोगों के घरों में ताला लगवा दिया गया था। बाद में उन्हें खुलवा दिया गया। उन्हें हिदायत दे दी गई है कि वे बेवजह बाहर नहीं निकलें। आरएस अवस्थी, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, निवाड़ी

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