मराठा आरक्षण को मिली मंजूरी, अब शिक्षा और सरकारी नौकरी में मिलेगा 10% आरक्षण

मराठा आरक्षण को मिली मंजूरी, अब शिक्षा और सरकारी नौकरी में मिलेगा 10% आरक्षण

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महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी।

Maratha Reservation: महाराष्ट्र में आरक्षण को लेकर कैबिनेट ने आज बड़ा फैसला सुनाया। कैबिनेट ने मराठा आरक्षण के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी। कैबिनेट इस बिल को आज महाराष्ट्र विधानसभा से पारित भी करा लिया है। महाराष्ट्र में लोग लंबे समय से मराठा आरक्षण की मांग कर रहे थे। आज महाराष्ट्र विधानसभा से मराठा आरक्षण बिल पास होने के बाद अब महाराष्ट्र में शिक्षा विभाग और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।

मराठा आरक्षण को क्यों मिली मंजूरी?

मराठा आरक्षण को मंजूरी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मिली है। 16 फरवरी को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुनील शुक्रे ने मराठा समुदाय के पिछड़ेपन की जांच की रिपोर्ट सीएम एकनाथ शिंदे को सौंपी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर मराठा आरक्षण को मंजूरी मिल पाई है।

50% आरक्षण की है मांग

बता दे 10 फरवरी से अनशन पर बैठे मराठा समाज ने मराठा आरक्षण के लिए 50 फ़ीसदी की मांग की थी। आज महाराष्ट्र सरकार ने आज दो दिन का राज्य विधानमंडल का विशेष सत्र बुला कर मराठों को 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने के लिए एक विधेयक पेश किया जो पास हो गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी बिल का स्वागत किया।

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कुनबी समुदाय से हैं मराठा

महाराष्ट्र में मराठा समाज खुद को कुनबी समुदाय के लोग बताते हैं। इसी के तहत इन लोगों ने सरकार से आरक्षण की मांग की। दरअसल, मराठा में कुनबी समुदाय कृषि से जुड़ा है। महाराष्ट्र में कुनबा को अन्य पिछड़ा वर्ग की कैटेगरी में रखा गया है। कुनबी समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण लाभ का मिलता है। इसी का हवाला देकर मराठा आरक्षण की मांग की गई थी।

26 जुलाई 1902 में रखी गई थी नींव

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की नींव 26 जुलाई 1902 को छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति शाहूजी ने रखी थी। उन्होंने राज्य में खाली पड़े सरकारी पद में 50% आरक्षण मराठा, कुनबी और अन्य पिछड़े समूहों को देने की बात कही थी। इसके बाद 1942 से 1952 तक बॉम्बे सरकार के दौरान भी मराठा समुदाय को 10 साल तक आरक्षण मिला था। लेकिन, फिर मामला ठंडा पड़ गया। तब से लेकर कई अनोदलन मराठा आरक्षण को लेकर किए गए मगर कोई परिणाम नहीं निकल रहा था।

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