बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता देने के मूड में नहीं मध्य प्रदेश सरकार,12 लाख से अधिक शासकीय कर्मचारी-पेंशनर प्रभावित

बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता देने के मूड में नहीं मध्य प्रदेश सरकार,12 लाख से अधिक शासकीय कर्मचारी-पेंशनर प्रभावित

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मध्य प्रदेश में शासकीय कर्मचारी और पेंशनरों को राज्य सरकार बड़ा हुआ महंगाई भत्ता देने के मूड में दिखाई नहीं दे रही है। जानिए कैसे चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगाई थी और कर्मचारी संगठन कैसे आंदोलन की तैयारी में है

मध्य प्रदेश में शासकीय कर्मचारी और पेंशनरों को राज्य सरकार बड़ा हुआ महंगाई भत्ता देने के मूड में दिखाई नहीं दे रही है आपको बता दे तत्कालीन शिवराज सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले कर्मचारी और पेंशनरों को चार प्रतिशत महंगाई भत्ता देने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी थी तब शिवराज ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ सरकार में शासकीय कर्मचारी और पेंशनरों को महंगाई भत्ता का हवाला देते हुए 4% बढ़ाने की बात कही थी जिसे चुनाव आयोग ने उस समय इस आदेश पर मतदान दिवस तक रोक लगा दी थी जानकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव के बाद से यह फाइल अब तक दो बार चीफ सेक्रेटरी वीर राणा के दफ्तर से वापस आ चुकी है

सूत्रों की माने तो केंद्र सरकार जल्द ही महंगाई भत्ते को बढ़ाने की तैयारी में है जिसकी जानकारी रखते ही प्रदेश के कर्मचारियों में आक्रोश है और प्रदेश के कर्मचारी संगठन एकत्रित होकर आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं

केंद्र दे रहा है 46%, एमपी में 42% ही मिल रहा

केंद्र सरकार ने जुलाई 2023 से 4% महंगाई भत्ता व महंगाई राहत दी थी, जिसके बाद केंद्रीय कर्मचारियों को कुल 46 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि राज्य में भी केंद्र के समान ही महंगाई भत्ता देने की परंपरा रही है। आचार संहिता के दौरान छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सरकारों ने अपने राज्य में जुलाई 2023 से 4% महंगाई भत्ते का लाभ दे दिया। मध्य प्रदेश के 7.50 लाख कर्मचारी और 4.50 लाख सेवानिवृत्त कर्मचारी केंद्र के समान महंगाई भत्ता व महंगाई राहत नहीं मिलने से प्रभावित हो रहे हैं।

मध्य प्रदेश  में महंगाई भत्ता से मतदान के पहले मांगी थी आयोग से अनुमति

विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन शिवराज सरकार ने कर्मचारियों को 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी थी। वोटिंग से चार दिन पहले धनतेरस के दिन 12 नवंबर को राज्य सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर तब आयोग ने यह कहकर रोक लगाई थी कि मतदान दिवस 17 नवंबर तक इस निर्णय को स्थगित रखा जाए। इसके बाद सरकार ने चुनाव आयोग को चुनाव परिणाम तक प्रस्ताव ही नहीं भेजा। बाद में इसे लेकर एक बार फिर फाइल चली फिर मुख्य सचिव के दफ्तर से लौटा दी गई। अब कर्मचारी इसलिए आक्रोशित हैं, क्योंकि केंद्र सरकार फिर महंगाई भत्ता देने वाली है। राज्य सरकार आनाकानी कर रही है

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मध्य प्रदेश महंगाई भत्ता से दो से 10 हजार रुपए तक का हर महीने नुकसान

सरकार के समान महंगाई भत्ते की राशि मंजूर नहीं होने से चतुर्थ श्रेणी से लेकर राजपत्रित अधिकारियों तक को दो हजार रुपए से 10 हजार रुपए तक का फायदा होना है। अखिल भारतीय सेवा में शामिल आईएएस अफसरों और न्यायिक सेवा के अफसरों को तो बढ़ा हुआ भत्ता देने का आदेश चुनाव आचार संहिता के दौरान ही जारी हो गया था, लेकिन बाकी कर्मचारियों व पेंशनर्स को इंतजार करना पड़ रहा है।
दिग्विजय सरकार के वित्त सचिव ने शुरू किया था भेदभाव

मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संगठन के संरक्षक सुधीर नायक कहते हैं कि मध्यप्रदेश सेवा के अधिकारी व कर्मचारियों के साथ इस भेदभाव की शुरुआत दिग्विजय सरकार की दूसरी पारी के दौरान तत्कालीन वित्त सचिव एपी श्रीवास्तव ने की थी। उनके द्वारा आईएएस के लिए महंगाई भत्ता देने का अलग और कर्मचारियों के लिए अलग आदेश निकाला गया। इसके बाद से कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है।

नायक के अनुसार पूर्व में आदेश में लिखा जाता था कि मध्यप्रदेश के लोकसेवकों को महंगाई भत्ता दिया जाएगा, जिसमें आईएएस समेत सभी अधिकारी और कर्मचारी आते थे। अब आईएएस अपने लिए तुरंत आदेश जारी करा लेते हैं। कर्मचारियों व पेंशनर्स के लिए पांच-पांच माह से आदेश पेंडिंग रखे जा रहे हैं। मोहन सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि कर्मचारियों के आक्रोश को रोका जा सके।

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महंगाई भत्ते में रोड़ा बन रहा आर्थिक संकट

मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देने में राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति रोड़ा बन रही है। कर्ज में डूबी सरकार लाड़ली बहना समेत अन्य योजनाओं‌ में दिए जाने वाले पैसों की व्यवस्था को लेकर पसोपेश में है। महंगाई भत्ते का भुगतान करने पर बढ़ने वाले खर्च को देखते हुए ही इसे टाला जा रहा है। साथ ही, कर्मचारियों को दिए जाने वाले एरियर्स को लेकर भी टालमटोल किया जा रहा है, इसलिए महंगाई भत्ते से संबंधित मामले में फैसला नहीं हो पा रहा। इसके अलावा, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी फाइल सीएम तक नहीं जाने देने को भी वजह बताया जा रहा है

मध्य प्रदेश महंगाई भत्ता से कर्मचारियों को हुआ 700 करोड़ का नुकसान

मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी के अनुसार सरकार द्वारा हर महीने 1करोड़ 29 लाख 77 हजार 199 लाड़ली बहनों को 1700 करोड़ दिए जा रहे हैं, पर कर्मचारियों को महीने में 150 करोड़ देने में परेशानी हो रही है। तिवारी ने कहा कि एक साल में सब्जियों के दाम 60% व दालों के दाम 15 से 20% बढ़ गए हैं।

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पिछले सात महीने से कर्मचारियों को 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता नहीं दिया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में 9200 करोड़ रुपए समय पर न देकर सरकार ने कर्मचारियों का नुकसान किया था। अब कर्मचारी मजबूर हो रहे हैं। इसी के लिए तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ द्वारा फरवरी महीने में प्रदर्शन किया जाएगा।

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