कोरोना संकट के दौरान जीवन रक्षक माने जा रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी धड़ल्ले से हो रही है. रेमडेसिविर की ब्लैक मार्केटिंग करने वाले एक ऐसे ही गैंग का इंदौर में पर्दाफाश हुआ है. पुलिस की माने तो यह गैंग ग्लूकोज और नमक मिलाकर नकली रेमडेसिविर बनाता था और पिछले एक महीने से मध्य प्रदेश में बेच रहा था.

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इंदौर पुलिस का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन की डिमांड बढ़ गई है, इस वजह से कई जगह पर रेमडेसिविर की कालाबाजारी और नकली रेमडेसिविर को बेचने की शिकायत मिल रही थी, गुजरात पुलिस ने हाल में सूरत में नकली रेमडेसिविर बेचने वाले 6 लोगों को पकड़ा था, जिनकी निशानदेही पर और सदस्य पकड़े गए हैं.

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इंदौर पुलिस की माने तो पिछले महीने गुजरात से 1200 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की खेप मध्य प्रदेश आई थी, यह खेप सुनील मिश्रा नामक एक शख्स को दी गई थी. पुलिस का कहना है कि गुजरात में गिरफ्तार कौशल वोहरा ने सुनील मिश्रा को इंदौर में 700 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की खेप दी थी.

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इंदौर पुलिस के मुताबिक, सुनील मिश्रा फिर सूरत गया और नकली रेमडेसिविर के 500 इंजेक्शन फिर लेकर आया था, 1200 में से 200 नकली रेमडेसिविर को देवास जिले में भेजा गया था, जबकि 500 नकली रेमडेसिविर को जबलपुर में स्वप्न जैन को दिया गया था. गुजरात पुलिस ने सुनील मिश्रा को गिरफ्तार किया था. फिर इंदौर पुलिस ने उसके पांच साथी को गिरफ्तार किया.

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इंदौर पुलिस का कहना है कि यह गैंग सोशल मीडिया के जरिए मरीजों के तीमारदारों से संपर्क करता, एक इंजेक्शन के बदले 35 से 40 हजार रुपये लिए जाते. इंदौर पुलिस ने सात इंजेक्शन को बरामद किया है, जो गुजरात में बने है और सब पर एक बैच नंबर है. अब इंदौर पुलिस सूरत में गिरफ्तार आरोपियों की कस्टडी लेने की कोशिश में जुट गई है

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