सूखे कचरे को अलग-अलग करने वाली देश की पहली ऑटोमैटिक मशीन इंदौर के ट्रेंचिंग ग्राउंड में लगाई गई है। ‘ऑटोमैटिक मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी’ मशीन से रोज एक शिफ्ट (आठ घंटे) में 300 और दो शिफ्ट में 600 टन सूखा कचरा प्रोसेस हो सकेगा। मशीन लगाने का मुख्य मकसद सूखा कचरा अलग-अलग करने वाले रैगपिकर्स को धूल से बचाना है। अभी वे मिट्टी और धूल के ढेर में से सूखा कचरा बीनते हैं। 20 करोड़ की इस मशीन में विदेश से आयातित तकनीक के सेंसर लगे हैं जो अलग-अलग ब्रांड के प्लास्टिक को पहचान लेंगे, जिससे यह जानकारी मिल सकेगी कि किस कंपनी का कितना प्लास्टिक ट्रेंचिंग ग्राउंड आ रहा है।

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नगर निगम ने करीब सालभर पहले अहमदाबाद की नेप्रा कंपनी से यह मशीन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) आधार पर लगाने का अनुबंध किया था। निगम ने मशीन और प्लांट के लिए करीब चार एकड़ जमीन कंपनी को उपलब्ध कराई है।

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10 साल तक कंपनी निगम को हर साल 1.51 करोड़ रुपए देगी। कंपनी ने मशीन का ड्राय रन (बिना कचरे के) शुरू कर दिया है। 15 अक्टूबर या उसके बाद कभी भी मशीन का लोकार्पण होगा। अभी ट्रेंचिंग ग्राउंड पर रोज करीब 600 टन सूखा कचरा प्रोसेस होता है और फिलहाल करीब 15 रैगपिकर्स वहां कचरा छांटते हैं।

25 तरह का सूखा कचरा छांटेगी

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट असद वारसी ने बताया कि यह 20 से 25 तरह का सूखा कचरा छांटकर अलग कर देगी।

– पानी और कोल्ड ड्रिंक्स के कौन से ब्रांड की बोतल कचरे में आ रही है। सेंसर ब्रांड को रीड कर लेंगे।

– मशीन आठ से 10 तरह के प्लास्टिक की वैरायटी को अलग करेगी।

– कपड़ा, चमड़ा, रबर और कागज को भी छांटेगी।

– मशीन से सेग्रिगेट होने वाले सूखे कचरे को रिसाइकिलिंग के लिए भेजा जाएगा।

जनप्रतिनिधियों को भी दिखाएंगे

निगमायुक्त आशीष सिंह ने बताया कि मशीन से रैगपिकर्स को भी सुविधा होगी। जनप्रतिनिधियों को इस मशीन की कार्यप्रणाली समझाने के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड लेकर जाएंगे। औपचारिक उद्घाटन जल्द होगा।

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