उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन अचानक बीस दिन बाद दुनिया के सामने आए और वो भी एक खाद फैक्ट्री के उद्घाटन समारोह में. इसके बाद एक सवाल है, जिसका जवाब पूरी दुनिया जानना चाहती है और वो ये कि आखिर इस फैक्ट्री में ऐसा क्या है, जो किम अचानक वहां जा पहुंचे? इस फैक्ट्री की अहमियत क्या है? अगर सच में किम बीस दिनों से बिलकुल ठीक थे तो फिर 15 अप्रैल को अपने दादा की जयंती और उत्तर कोरिया के स्थापना दिवस समारोह से वो दूर क्यों रहे? क्या ये फैक्ट्री किम के लिए कोरिया के स्थापना दिवस से ज्यादा अहम है?

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दरअसल, 15 अप्रैल का दिन नॉर्थ कोरिया के स्थापना दिवस के तौर पर मनाया जाता है. इसी दिन किम जोंग उन के दादा का जन्मदिन भी होता है. इस खास दिन के मौके पर ना सिर्फ उत्तर कोरिया में राष्ट्रीय अवकाश होता है, बल्कि इस दिन के समारोह में जो हिस्सा नहीं लेता उसे ईश निंदा के बराबर का गुनहगार माना जाता है. मगर पहली बार था जब किम जोंग उन इस समारोह से गायब रहे. लेकिन फर्टिलाइजर फैक्ट्री के उद्घाटन में वो पहुंच गए.

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बीस दिन तक दुनिया को छकाने के बाद मार्शल किम जोंग उन शुक्रवार को जिस फर्टिलाइजर फैक्ट्री का उद्घाटन करने पहुंचे वो फैक्ट्री उत्तर कोरिया के दक्षिण पूर्वी इलाके सुनचियान में है. हालांकि इस फैक्ट्री का नाम फर्टिलाइजर फैक्ट्री है, मगर अमेरिका और दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसियों की मानें तो इस फैक्ट्री की असलियत कुछ और है. इस फैक्ट्री में दरअसल, खाद के नाम पर तबाही का सामान तैयार होता है और इसीलिए किम जोंग उन के लिए ये फैक्ट्री बेहद अहम है.

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हालांकि उत्तर कोरिया की मीडिया के मुताबिक किम जोंग उन ने जिस फैक्‍ट्री का उद्घाटन किया, वह उर्वर‍क यानी खाद बनाती है. यहां ऐसा कोई तबाही का सामना तैयार नहीं होता. मगर मैग्जीन न्‍यूज वीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस फैक्ट्री में फर्टिलाइजर नहीं बल्कि यू‍रेनियम निकालने का कारखाना है. इस कारखाने में फॉस्फोरिक एसिड से यूरेनियम निकालने का काम होता है. उसी यूरेनियम का इस्तेमाल किम अब परमाणु बम बनाने में करेगा.

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अमेरिका और दक्षिण कोरिया का भी मानना है कि फर्टिलाइजर फैक्ट्री के नाम पर इस कारखाने से यूरेनियम निकालने की कोशिश हो रही है. वो भी फॉस्फोरिक एसिड से. परमाणु बम बनाने के लिए यूरेनियम सबसे जरूरी होता है. पर यूरेनियम हर देश को उतनी मात्रा में हासिल नहीं है. फिर यूरेनियम का इस्तेमाल कौन सा देश किस चीज के लिए कर रहा है, इस पर भी बाकी दुनिया की नजरें गड़ी होती हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक कई देश खाद फैक्ट्रियों में फॉस्फोरिक एसिड से चोरी-छुपे यूरेनियम निकालने की कोशिश करते रहे हैं. उसी को देखते हुए अब उत्तर कोरिया भी वही करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि उत्तर कोरिया पहले से ही परमाणु बमों का जखीरा रखे हुए है. मगर बमों की होड़ के चलते वो और ज्यादा बम बनाने की कोशिश में लगा रहता है. जिसके लिए उसे हमेशा यूरेनियम की जरूरत पड़ती है. अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से सीधे तौर पर वह यूरेनियम हासिल कर नहीं सकता. लिहाजा यूरेनियम हासिल करने का उसने दूसरा तरीका ढूंढ निकाला है और वो है ये फैक्ट्री.

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खाद यानी उर्वरक के साथ यूरेनियम बनाने में सक्षम होने की वजह से ही यह फैक्ट्री किम जोंग उन के लिए बेहद खास है. इतना खास कि बीस दिन का अपना अज्ञातवास खत्म करने के लिए किम ने इसी फैक्ट्री को चुना और इसके उद्घाटन पर बीस दिन बाद पहली बार सामने आए. इस फैक्ट्री से उत्तर कोरिया जहां उर्वरक हासिल कर सकेगा. वहीं इसी फैक्ट्री में तैयार यूरेनियम से वह परमाणु बम भी बना सकेगा.

विशेषज्ञों के मुताबिक खाद बनाने के नाम पर इस तरह किम दुनिया को इस फैक्ट्री की असलियत को लेकर आसानी से बेवफूक बना सकता है. उत्तर कोरिया के पास फिलहाल बीस से भी ज्यादा परमाणु बम हैं. वो जब-तब परमाणु बमों का परीक्षण कर दुनिया को चौंकाता रहता है. कहते हैं कि किम के पास अभी भी यूरेनियम का इतना जखीरा है कि वो आने वाले वक्त में आसानी से कई और परमाणु बम बना सकता है.

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