भोपाल. केंद्र सरकार की नई अफीम नीति ने प्रदेश के हजारों किसानों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। नई नीति के अनुसार, किसानों को अब मार्फिन के आधार पर पट्टे मिलेंगे। प्रति हेक्टर 4.5 मार्फिन प्रतिशत देना अनिवार्य है। ऐसे में प्रदेश के हजारों किसानों के पट्टे निरस्त होने की कगार पर पहुंच गए है। अफीम नीति का जो खाका सामने आया है, वह पूरी तरह किसानों को गुमराह करने वाला है।

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भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन 1 अक्टूबर 2019 के अनुसार मप्र, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के उन अफीम किसानों को 2019-20 में अफीम के पट्टे की पात्रता होगी, जिन्होंने बीते फसल वर्ष में अपनी अफीम में 4.5 प्रतिहेक्टर की दर से मार्फिन प्रतिशत दिया और इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि अब किसानों को मार्फिन के आधार पर पट्टे दिये जाएंगें।

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घटेगी किसानों की संख्या

इस वर्ष जारी की गई केन्द्र सरकार द्वारा नई अफीम नीति में यह निकल कर सामने आया है कि किसानों की संख्या घटेगी किसानों द्वारा न्यूनतम औसत देने के बाद भी मार्फिन प्रतिशत पर लायसेंस जारी करने का आदेश जारी हुआ है। मार्फिन प्रतिशत किसान के हाथ में नहीं होता है, अच्छी क्वालिटी की अफीम देने के बाद भी बहुत सारे किसानों के पट्टे कटेगें। क्योंकि मार्फिन प्रतिशत 4.5 से कम है। इस वर्ष अफीम नीति में किसानों का रकबा भी कम होगा क्योंकि अधिकतम किसानों का मार्फिन प्रतिशत 4.5 से 5.2 तक ही है तो उन किसानों को 6 आरी के लायसेंस ही जारी किए जाएंगें जिससे लगता है कि इस वर्ष 30 प्रतिशत रकबा कम हो जायेगा।

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ये है 2019-20 की अफीम नीति

-नई नीति के तहत जिन किसानों का फसल वर्ष 2018-19 में मार्फिन प्रतिशत 4.5 रहा है। वही किसाना पात्र रहेगे, इस वर्ष औसत आधार पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

– वर्ष 19.20 में तीन सेलब में अफीम रकबा जारी किया गया है, मार्फिन प्रतिशत 4.5 से अधिक व 5.4 से कम मार्फिन वाले किसानों को 0.06 आरी मार्फिन प्रतिशत 5.4 से अधिक व 5.9 से कम मार्फिन वाले किसानों को 0.10 आरी मार्फिन प्रतिशत 5.9 से अधिक, अधिक उपज वाले किसानों को 0.12 आरी 3 वर्ष 2018-19 में घोषित अफीम नीति के अनुसार जिन किसानों के नामान्तरण नही हुवे थें। उन किसानों का भी इस वर्ष अफीम नीति में वारिस अनुसार नामान्तरण किये जाएंगें।

– वर्ष 2016-17 और 2017-18 मे कटे किसानों के पट्टे पांच साल की औसत एवरेज निकाल कर पट्टे जारी किये जायेगें शर्त यह रहेगी कि उनके पिछले पाच साल की औसत एवरेज 100 प्रतिशत या अधिक हो 5 वर्ष 2020-21 में पोस्त खेती के लिये लाईसेंस प्राप्त करने की पात्रता 2019-20 के लिये 5.9 किलो मार्फिन प्रतिशत प्रति हेक्टेयर न्यूनतम उपज देना जरूरी रहेगी।

– किसान अधिकतम दो भूखण्डों में अफीम की खेती कर सकता है साथ किसान चाहे तो दूसरे किसानों की जमीन लीज पर लेकर अफीम की खेती कर सकता है।

– जिन किसानों की राजस्व भूमि पड़ोसी गांव में है और उनकी राजस्व सीमा मिलती है तो वहा भी किसान खेती कर सकता है।

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पट्टाधारी किसान की मृत्यु के वारिस भी होंगे पात्र

नई नीति के तहत जिन किसानों के परिवार में पट्टाधारी किसान के दिवंगत उत्तराधिकारी को अनुमति नहीं मिली थी, उसके परिवार के उत्तराधिकारी भी इसके पात्र होंगे और जिन्होंने पट्टा जमा नहीं कराया था। वे किसान भी वर्ष 2018-19 में घोषित अफीम नीति में उन किसानों का भी इस वर्ष अफीम नीति में वारिस अनुसार नामान्तरण किये जाएंगें। साथ ही किसानों अधिकतम दो भूखण्डों में अफीम की खेती कर सकता है एवं किसान चाहे तो दूसरे किसानों की जमीन लीज पर लेकर अफीम की खेती कर सकता है। वहीं जिन किसानों की राजस्व भूमि पड़ोसी गांव में है और उनकी राजस्व सीमा मिलती है तो वहां भी किसान खेती कर सकता है। केन्द्र द्वारा घोषित नई अफीम नीति से हजारों किसानों को यह लाभ मिलेगा।

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