संयुक्त अरब अमीरात उन देशों के काम कोटा पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है, जो अपने नागरिकों को स्वीकार करने से इंकार करते हैं। दरअसल, कोरोना वायरस प्रकोप के बीच कई कर्मचारी खाड़ी देशों को छोड़ने की इच्छा रखते हैं। मानव संसाधन मंत्रालय कुछ देशों के साथ अपने समझौतों को निलंबित करने की योजना पर विचार कर रहा है। सरकारी मीडिया WAM ने एक अज्ञात सरकारी अधिकारी के हवाले से यह खबर दी है।

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अधिकारी के अनुसार, कई देशों ने अपने नागरिकों के प्रत्यावर्तन के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया है, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। यूएई में 90 लाख से अधिक लोगों का घर है, जिनमें से ज्यादातर प्रवासी हैं। यहां अभी तक कोरोना वायरस की वजह से 20 मौतें हो चुकी हैं, जबकि वायरस से संक्रमण के 3,736 मामले सामने आ चुके हैं।

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यहां मॉल, रेस्तरां बंद कर दिए गए हैं और अधिकांश उड़ानों को रोक दिया गया है। दुबई स्थित गल्फ न्यूज ने रविवार को रिपोर्ट दी कि COVID-19 का टेस्ट निगेटिव आने पर जो भारतीय और अन्य देशों के नागरिक वहां फंसे हुए हैं वे यदि चाहें तो उन्हें उनके देश में वापस भेजा जा सकता है।

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भारत के लिए यूएई के राजदूत अब्दुल रहमान अल बन्ना ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यूएई के विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय ने पिछले कुछ हफ्तों के दौरान सभी देशों के दूतावासों को एक “नोट वर्बेल” भेजा था। यूएई में फंसे 25,000 से अधिक पाकिस्तानियों ने दुबई में अपने राजनायिक मिशनों में पंजीकरण कराया है, ताकि उन्हें वापस भेजा जा सके।

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