मध्य प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर सो से अधिक अफसर कर रहे काम,कई हुए रिटायर अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

मध्य प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर सो से अधिक अफसर कर रहे काम,कई हुए रिटायर अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

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मध्य प्रदेश के पीडब्ल्यूडी विभाग में फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर सौ से अधिक अफसर काम कर रहे हैं. वर्षों पहले इन अफसरों के खिलाफ शिकायत छानबीन समिति को दी गई, लेकिन अब तक जांच आगे नहीं बढ़ी है. इस बीच सभी अफसर इसी जाति प्रमाण के आधार पर प्रमोशन भी पाते रहे. यहां तक कि कई अफसर रिटायर भी हो गए.

मध्य प्रदेश में लोक निर्माण विभाग (PWD) की स्थिति चिंताजनक है. इस विभाग में 100 से अधिक अधिकारियों पर उनकी जाति सत्यापित करने के बजाय फर्जी जाति प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करके नौकरी प्राप्त करने और उसी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर प्रमोशन प्राप्त करने का आरोप है. उच्चाधिकारियों को इस मामले में शिकायत की गई है, लेकिन जांच का कार्रवाई में कोई रूचि नहीं दिखा जा रहा है. इस आरोप का मतलब यह नहीं है कि यह केवल छोटे कर्मचारियों पर ही लगा है, बल्कि इसमें जेई से लेकर विभाग के सचिव तक सभी वर्गों को शामिल किया गया है।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इस समय मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग में तैनात सचिव, प्रमुख अभियंता, मुख्य अभियंता, एक्सईएन, और जेई तक के अधिकारियों की नौकरी की जांच के दायरे में बदल दिया गया है। मामले की जांच के लिए कई सालों से राज्य की छानबीन समिति कार्रवाई कर रही है। जांच के आरंभ होने के बाद, अधिकांश अफसरों को प्रमोशन प्राप्त होते हुए देखा गया है, लेकिन अब तक जांच को आगे नहीं बढ़ा गया है।

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एक नोटशीट के आधार पर, जिसमें एक मामले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र का संदेह है, दिनांक पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता की सेवानिवृत्ति के दिन मंत्री को नोटिस करने की आवश्यकता पड़ी है।

मंत्री ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है और नोटशीट पहुंचने तक इसे ठंडे बस्ते में रखा गया है क्योंकि अफसर सेवानिवृत्ति लेकर अपने घर चले गए थे। ईएनसी के मुखिया तक पर भी जांच चल रही है, जिन्हें फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी और पदोन्नति की आरोपों का सामना करना है।

इसके अलावा, पीडब्ल्यूडी के ईएनसी नरेंद्र कुमार के खिलाफ भी कई शिकायतें हैं, लेकिन उनके रिटायर होने तक जांच को आगे नहीं बढ़ा गया है।

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पीडब्ल्यूडी में 136 शिकायतें

यही स्थिति विभाग के सचिव के साथ भी है. राज्य की छानबीन समिति से मिली जानकारी के मुताबिक इस समय अकेले पीडब्ल्यूडी के ही कुल 136 अफसरों के खिलाफ शिकायतें लंबित हैं. इनमें इंजीनियर आरके मेहरा सचिव पीडब्ल्यूडी, एससी वर्मा मुख्य अभियंता, जिले सिंह संयुक्त परियोजना संचालक पीआईयू, संजय खांडे प्रभारी मुख्य अभियंता, अपूर्व गौर, आशीष रघुवंशी और निशांत पचौरी के नाम प्रमुख है.

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