हिन्दी जागृति मंच का द्वितीय चरण संपन्न

कालापीपल/शाजापुर।

बच्चों को कविता लिखने से पहले यह तय कर लेना चाहिए कि कविता किस रस में लिखी जा रही है। साथ ही तुकबंदी का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसको लिखने की शुरुआत पैरोडी से करना चाहिए। उक्त बातें कालापीपल के वरिष्ठ साहित्यकार हुकुम सिंह देशप्रेमी ने रविवार को शासकीय उत्कृष्ट विधालय में बच्चों को संबोधित करते हुए कही।वे यहां हिन्दी जागृति मंच द्वारा आयोजित की जा रही विभिन्न प्रतियोगिताओं में निर्णायक के तौर पर मौजूद रहे। उन्होंने उनकी प्रतिनिधि रचनाओं की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर निर्णायक मंडल में कालापीपल की प्रभारी परियोजना अधिकारी ममता मनावत, वरिष्ठ अध्यापक एवं कवि कैलाश परमार एवं हरीश सोनी भी मौजूद रहे।हिन्दी पखवाड़े के तहत हिन्दी भाषा के प्रति जागरूकता को लेकर 19 अगस्त से शुरू हुई हिन्दी प्रतियोगिता के द्वितीय चरण का आयोजन शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में किया गया। जिसमें कालापीपल के विभिन्न विद्यालयों के अंतरविद्यालयीन प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी विद्यार्थियों ने प्रस्तुति दी।प्रतिभागियों के द्वारा मालवी लोकगीत, स्वरचित कविता पाठ व लेखन एवं निबंध लेखन कर प्रतियोगिता में अव्वल आने के लिए एक से बडकर एक प्रस्तुतियां दीं गईं। जहां एक प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत लोकगीत में मालवा की संस्कृति की झलक देखने को मिली। तो वहीं बाल कवियों द्वारा लिखित स्वरचित कविताओं व निबंध लेखन कर निर्णायकों सहित मौजूद दर्शकों का मन मोह लिया। आयोजन का संचालन हिन्दी जागृति मंच के सचिव अनिल शर्मा ने किया एवं आभार सोहन दीक्षित ने माना।आर्बिटर की भेजी तस्वीरों से विक्रम की लोकेशन मिली, लेकिन लैंडर से नहीं हो पाया संपर्क: इसरोइस अवसर पर मंच के सदस्य संदीप गेहलोत, सदस्य महेन्द्र तोमर, भगवत सिंह राजपूत, मुकेश दुबे, पवन पाटीदार, चन्दरसिंह परमार, सुनील मकवाना, अजीत मेवाड़ा, श्रीकांत परमार, राजमल मेवाड़ा आदि मौजूद रहे। बता दें कि आयोजित प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को 15 सितंबर को मंच द्वारा आयोजित होने वाले ‘हिन्दी गौरव सम्मान एवं व्याख्यानमाला’ में सम्मानित किया जाएगा। व्याख्यानमाला मेंhttps://youtu.be/BBxy22LP_pEमाखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव प्रो.संजय द्विवेदी एवं दैनिक सुबह सवेरे के संपादक गिरीश उपाध्याय कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
@vicharodaya

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