LPG ग्राहकों के लिए खुशखबरी
LPG ग्राहकों के लिए खुशखबरी

हाल के महीनों में देश के 15 प्रांतों के चुनिंदा जिलों में एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा था. लेकिन अब यह संख्या घटकर 8 राज्यों की रह गई है जिनमें केंद्र शासित प्रदेश भी हैं.

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क्या आने वाले समय में रसोई गैस सिलेंडर के दाम 1000 तक पहुंच जाएंगे? LPG सिलेंडर की इतनी ऊंची कीमत बढ़ाने पर सरकार का क्या विचार है, ऐसी कोई खबर सामने नहीं आई है. लेकिन सरकार के एक आंतरिक मूल्यांकन (internal assessment) में इस बात की भनक मिली है कि उपभोक्ता एक सिलेंडर के लिए 1000 रुपये तक देने के लिए तैयार हैं. सूत्रों से इस बात की जानकारी के मुताबिक, बढ़े दाम पर एलपीजी सब्सिडी को लेकर सरकार का क्या विचार है, इस बारे में अभी कुछ भी साफ नहीं है. सूत्रों के मुताबिक, एलपीजी सिलेंडर को लेकर सरकार दो रुख अपना सकती है. पहला, या तो सरकार बिना सब्सिडी के सिलेंडर सप्लाई करे. दूसरा, कुछ चुनिंदा उपभोक्ताओं को भी सब्सिडी का लाभ दिया जाए. सब्सिडी देने के बारे में अभी कुछ भी साफ-साफ नहीं कहा गया है. लेकिन यह स्पष्ट है कि 10 लाख रुपये इनकम के नियम को लागू रखा जाएगा और कुछ चुनिंदा उज्ज्वला लाभार्थियों को सब्सिडी का लाभ मिलेगा. बाद बाकी लोगों के लिए सब्सिडी खत्म हो सकती है.

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सब्सिडी बंद है या चालू?

यहां ध्यान रखने वाली बात है कि कुछ जगहों पर पिछले कई महीनों से एलपीजी पर सब्सिडी बंद है और यह नियम मई 2020 से चला आ रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कोविड महामारी के दौरान कच्चे तेल और गैस की कीमतें गिरने के बाद यह कदम उठाया गया. हालांकि सरकार ने एलपीजी सिलेंडर (LPG cylinder) पर पूरी तरह से सब्सिडी बंद नहीं की है और यह प्रावधान देश के दूर-दराज इलाकों में जारी रखा गया है.

हाल के महीनों में देश के 15 प्रांतों के चुनिंदा जिलों में एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा था. लेकिन अब यह संख्या घटकर 8 राज्यों की रह गई है जिनमें केंद्र शासित प्रदेश भी हैं. इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लद्दाख, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार और कुछ उत्तर-पूर्वी राज्य शामिल हैं. यहां एलपीजी सब्सिडी की व्यवस्था चालू रखी गई है.

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सब्सिडी पर सरकार का इतना खर्च

सब्सिडी पर सरकार का खर्च देखें तो वित्तीय वर्ष 2021 के दौरान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी कि डीबीटी के तहत 3,559 रुपये व्यय किए गए. वित्तीय वर्ष 2020 में यह खर्च 24,468 करोड़ रुपये का था. डीबीटी स्कीम की शुरुआत जनवरी 2015 में की गई थी जिसके तहत ग्राहकों को गैर सब्सिडी एलपीजी सिलेंडर का पूरा पैसा चुकाना होता है जबकि सरकार की तरफ से सब्सिडी का पैसा उपभोक्ता के बैंक खाते में रिफंड कर दिया जाता है. यह रिफंड डायरेक्ट होता है, इसलिए स्कीम का नाम DBTL रखा गया है.

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1 सितंबर को सरकार ने एलपीजी सिलेंडर के दाम में 25 रुपये की वृद्धि की थी. यह बढ़ोतरी 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर पर की गई थी. इस बढ़ोतरी के साथ दिल्ली में सिलेंडर के दाम 884.50 रुपये हो गए. मुंबई में 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर के दाम अभी 884.50 और चेन्नई में 900.50 रुपये निर्धारित हैं.

क्या केरोसिन से खाना बनाएंगे लोग

पूर्व में मीडिया में ऐसी कई खबरें सामने आई हैं जिसमें कहा गया कि एलपीजी सब्सिडी खत्म करने का सबसे बुरा असर कमजोर वर्ग के लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है. ग्रामीण इलाकों के कई घरों ने एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल बंद कर दिया और केरोसिन या लकड़ी से खाना पकाना शुरू कर दिया. इसकी वजह ये बताई गई कि अधिसंख्य लोग इस स्थिति में नहीं है कि 800 रुपये सिलेंडर के दाम पर खर्च करें. अगर आगे एलपीजी सिलेंडर के दाम और बढ़ते हैं तो मुश्किलें और गंभीर हो सकती हैं.

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