जेपी नड्डा के खिलाफ लगे 'वापस जाओ' के नारे, AISA ने किया घेराव

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा पटना कॉलेज में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे. वो जैसे ही कैंपस में पहुंचने के बाद अपनी गाड़ी से बाहर निकले तो छात्रों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी.
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पटना कॉलेज में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के खिलाफ वापस जाओ के नारे लगे हैं इतना ही नहीं कॉलेज में छात्र संगठन एआईसा ने कॉलेज परिसर में उनकी कार का घेराव भी किया आपको बता दें राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पटना कॉलेज में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे लेकिन जैसे ही वह कैंपस में पहुंचे और अपनी गाड़ी से बाहर निकले तो छात्रों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी मामले को तूल पकड़ता देख जेपी नड्डा अपनी कार में वापस बैठ गए लेकिन इसके बावजूद छात्र रुके नहीं और उनकी कार को भी घेर लिया

मिली जानकारी के मुताबिक इस दौरान छात्र पटना विश्वविद्यालय को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की मांग कर रहे थे आपको बता दें जेपी नड्डा खुद भी पटना कॉलेज के छात्र रह चुके हैं खास बात यह रही कि जेपी नड्डा के खिलाफ पटना कॉलेज में उस वक्त विरोध प्रदर्शन हो रहा है जब राज्य में उनकी पार्टी की एनडीए के साथ गठबंधन में सरकार है ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि राज्य सरकार और पुलिस को इस विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की पहले से कोई सूचना कैसे नहीं मिली.

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गौरतलब है कि इन दिनों बिहार की राजधानी पटना में बीजेपी एक बड़ी बैठक का आयोजन करा रही है. बिहार में लंबे अरसे बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP)  ऐसी किसी बैठक का आयोजन करा रहा ही. इस बैठक के दौरान पार्टी के शीर्ष नेता जिनमें गृहमंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा भी शामिल हैं, देश भर के वरिष्ठ पार्टी नेताओं से संवाद कर रहे हैं. हालांकि, BJP की इस बैठक को लेकर बिहार के सीएम नीतीश कुमार खासे उत्साहित नहीं दिख रहे हैं. यही वजह है कि वह इस बैठक से दूरी बना सकते हैं.

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पटना में दो दिवसीय इस बैठक में देशभर से बीजेपी के 750 से ज्यादा नेता शामिल हो रहे हैं. उधर, जनता दल यूनाइटेड इस बैठक को लेकर असहज होते दिख रहे हैं. नीतीश कुमार के समर्थक बीजेपी की इस बैठक के आयोजन के समय को लेकर भी सवाल खड़े कर रहे हैं. उनका कहना है कि राज्य इन दिनों भीषण सूखे से जूझ रहा है. जिस तरह से पटना शहर इस बैठक को लेकर होडिंग्स और बैनर से पटा पड़ा है, उससे यह सवाल तो जरूर उठता है कि आखिर ऐसे में इस बैठक के आयोजन की क्या जरूरत थी. फिलहाल बिहार में कोई चुनाव भी नहीं होने हैं, ऐसे में इस तरह की बैठक के लिए पटना को चुनना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है.

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