फास्टटैग से धोखाधड़ी
फास्टटैग से धोखाधड़ी

टोल टैक्स भुगतान को आसान बनाने के लिए नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने फास्टटैग की शुरुआत की है. हालांकि अब ये फास्टटैग भी साइबर अपराधियों के निशाने पर आ गया है. बता दें कि फास्टटैग से धोखाधड़ी होने का मामला सामने आया है. दरअसल मध्य प्रदेश के बैतूल में ऐसे दो मामले सामने आए हैं, जहां दो व्यापारियों की कार कार क्रमशः छिंदवाड़ा और बैतूल में खड़ी थी लेकिन उनके खाते से महाराष्ट्र के यवतमाल जिले और पाटन सांवगी के एक टोल टैक्स पर पैसे कटने का मैसेज आया. फिलहाल दोनों व्यापारियों ने एनएचएआई से इसकी शिकायत की है.

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क्या है मामला
बता दें कि शहर के उद्योगति अंबेश बलवापुरी अपनी कार से 3 जुलाई को छिंदवाड़ा गए थे. इस दौरान उन्होंने रास्ते में मिलानपुर और चिखली टोल प्लाजा पार किया. जहां उनके फास्टटैग खाते से पैसे कटे. इसके बाद छिंदवाड़ा पहुंचने के बाद अंबेश बलवापुरी 4 जुलाई को भी छिंदवाड़ा में ही ठहरे लेकिन 4 जुलाई की रात करीब 8.30 बजे उनके फोन पर मैसेज आया कि उनके फास्टटैग खाते से यवतमाल के केलापुर टोल प्लाजा पर 90 रुपए कटे हैं. हैरानी की बात ये थी कि अंबेश बलवापुरी की कार छिंदवाड़ा में ही थी और जहां टोल टैक्स कटने का मैसेज आया, वो जगह छिंदवाड़ा से 295 किलोमीटर दूर है. इसके बाद अंबेश बलवापुरी ने इसकी शिकायत नेशनल हाइवे ऑथारिटी ऑफ इंडिया से की.

दूसरा मामला
दूसरा मामला बैतूल के सर्राफा कारोबारी उषभ गोठी का है. दरअसल उषभ के फोन पर गुरुवार को शाम 4 बजे के करीब मैसेज आया, जिसमें उनके फास्टटैग खाते से महाराष्ट्र के पाटन सावंगी में 90 रुपए का टोल प्लाजा कटने की जानकारी दी गई. यह मैसेज मिलने के बाद उषभ घबरा गए और उन्होंने सबसे पहले अपनी गाड़ी चेक की. जब उन्होंने देखा कि गाड़ी उनके घर के बाहर ही खड़ी हुई है तो उन्हें राहत मिली. उषभ की कार का टोल प्लाजा बैतूल से 175 किलोमीटर दूर पाटन सावंगी में कटा था. उषभ ने भी इसकी शिकायत NHAI से की है.

ये है खतरा
जानकारों का कहना है कि ऐसा हो सकता है कि किसी शातिर अपराधी ने नकली नंबर प्लेट लगाकर और किसी तरह से पीड़ित के फास्टैग खाते से अपना खाता लिंक कर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया है. ऐसे में आशंका ये है कि अगर उक्त अपराधी द्वारा किसी आपराधिक घटना को अंजाम दिया जाता है तो उस स्थिति में पीड़ित फंस सकते हैं क्योंकि टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे और उनके खाते से कटे टोल टैक्स के पैसे उनके खिलाफ अहम सबूत साबित हो सकते हैं. यही वजह है कि दोनों व्यापारी चिंतिंत हैं और उन्होंने इसकी शिकायत दर्ज कराई है.

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यदि किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसी घटना घटती है तो उसे फास्टटैग पर लिखे टोल फ्री नबंर पर कॉल करना चाहिए या फिर मेल करके अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए. NHAI के टोल फ्री नंबर 1033 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.

वहीं इस मामले को लेकर जब एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर बीपी गुप्ता और आरके गुप्ता से बात की गई तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. उनका कहना है कि हो सकता है कि पीड़ित व्यक्ति के आरसी पर किसी अन्य व्यक्ति ने फास्टटैग बनवा लिया हो. हालांकि ऐसी स्थिति में पीड़ित के खाते से बार-बार पैसे कटने चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. आरके गुप्ता का कहना है कि यह साइबर जांच का विषय है.

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फास्टटैग के सिस्टम इंजीनियर रूपेश पवार का कहना है कि हो सकता है कि यह बैंक की गड़बड़ी हो, ऐसे में पीड़ितों को बैंक से संपर्क करना चाहिए. उनका कहना है कि कभी कभी लोग एक ही गाड़ी पर 5-5 फास्टटैग जारी कर दिए जाते हैं. साथ ही कई बार फास्टटैग बनाने में एक डिजिट का अंतर आने पर भी ऐसी समस्याएं हो सकती हैं.

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