सिंघु बॉर्डर पर एक और किसान का शव मिला.

पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद आत्महत्या का मामला बताया,फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा

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सिंघु बॉर्डर (Singhu Border Farmer Death) पर बुधवार को फांसी के फंदे पर एक किसान का शव लटका मिला है. मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआती जांच में किसान के आत्महत्या करने की बात सामने आई है. मृतक किसान का नाम गुरप्रीत सिंह निवासी पंजाब (फतेहगढ़)बताया जा रहा है.
किसान प्रधान जगजीत सिंह ढलेवाल की यूनियन और बीकेयू सिद्धपुर से संबंधित बताया जा रहा है. किसान फतेहगढ़ के  रुड़की गांव और अमरोह तहसील का रहने वाला बताया जा रहा है. फ़िलहाल पुलिस ने किसान के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. अभी यह पता नहीं चला है कि उसकी सिंघु बॉर्डर पर हत्या हुई या आत्महत्या हुई. कुंडली थाने की पुलिस दोनों एंगल पर जांच कर रही है.

पुलिस ने बताया कि किसान आंदोलन में बुधवार को हुड्डा सेक्टर 63/ 64 अंसल सुशांत सिटी नांगल रोड पर नजदीक पर पार्कर मॉल के पास 45 साल के किसान गुरप्रीत सिंह पुत्र गुरमेल सिंह ने नीम के पेड़ पर रस्सी बांधकर फांसी लगा ली. गुरप्रीत यहां पर अपने गांव की ट्रॉली में अकेला था. यह बीकेयू सिद्धपुर जिसके प्रधान जगजीत सिंह ढलेवाल कि यूनियन से है. डेड बॉडी को 8:10 AM पर GH सोनीपत ले जाया गया स्थानीय पुलिस कार्रवाई कर रही है. फिलहाल मामला आत्महत्या का नज़र आ रहा है.

किसानों ने फिर दिया अल्टीमेटम
उधर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) 26 नवंबर को आंदोलन का एक साल पूरे होने पर दिल्ली की सीमाओं पर बड़ी सभाएं करने का ऐलान किया है. 29 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने पर हर दिन 500 ट्रैक्टर से किसान संसद तक मार्च निकालेंगे. सिंघु बॉर्डर पर मंगलवार को हुई बैठक में किसान आंदोलन की आगे की रणनीति तय की गई है. हरियाणा के संगठनों की ओर से गुरनाम सिंह चढूनी ने 26 नवंबर को दिल्ली कूच का प्रस्ताव रखा, लेकिन बैठक में इस पर कोई फैसला नहीं हुआ.

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करीब दो घंटे तक चली बैठक में किसान नेताओं ने आंदोलन को आक्रामक करने पर जोर दिया. वरिष्ठ नेता आंदोलन को शांतिपूर्ण और अनुशासन के साथ चलाने पर सहमति कायम करते रहे. किसान नेता राकेश टिकैत के दिए दिल्ली कूच के अल्टीमेटम पर भी सहमति नहीं बनी. इसी प्रकार गुरनाम सिंह चढूनी के दिल्ली कूच और पंजाब के किसान नेताओं के कुंडली मानेसर पलवल एक्सप्रेस वे जाम के प्रस्ताव को भी फिलहाल होल्ड पर रखा गया है.

26 नवंबर को दिखाएंगे ताकत
मिली जानकारी के मुताबिक 26 नवंबर को किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर किसान नेता ताकत दिखाएंगे. इसी दिन पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान से दिल्ली के सभी मोर्चों पर भारी भीड़ जुटाई जाएगी और बड़ी सभाएं की जाएंगी. 26 नवंबर को संविधान दिवस भी है. किसान 26 नवंबर को सभी राज्यों की राजधानियों में, सिवाय उन राज्यों को छोड़कर जो दिल्ली की सीमाओं पर हैं, लामबंद होंगे. किसान नेताओं ने श्रमिकों, कर्मचारियों, खेतिहर मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और छात्रों द्वारा बड़े पैमाने पर संयुक्त राज्यव्यापी कार्रवाई का आह्वान किया है.

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28 को मुंबई में किसान महापंचायत
बैठक में तय किया गया कि 28 नवंबर को, मुंबई के आजाद मैदान में किसान-मजदूर महापंचायत का आयोजन किया जाएगा. यह आयोजन संयुक्त शेतकारी कामगार मोर्चा (एसएसकेएम) के बैनर तले 100 से ज्यादा संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से होगा. 28 नवंबर को महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है.

29 को किसानों का संसद कूच
दिल्ली में संसद का शीतकालीन सत्र 29 जून से शुरू होगा. एसकेएम ने निर्णय लिया कि 29 नवंबर से संसद के इस सत्र के अंत तक 500 चुने हुए किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में हर दिन संसद जाएंगे. इसका मकसद केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाना है. साथ ही केंद्र सरकार को उन मांगों को मानने के लिए मजबूर करना है, जिसके लिए देश भर के किसान एक साल से संघर्ष कर रहे हैं.

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