राजधानी में कोरोना संक्रमण की रफ्तार अप्रैल की तुलना में धीमी हुई है। दो सप्ताह पहले रोजाना औसतन 1900 संक्रमित मरीज मिल थे। यह आंकड़ा घटकर 1600 हो गया है। भोपाल में मरीजों की संख्या कम होने और दूसरे राज्यों में बेड की दिक्कत होने से मरीज यहां आने लगे है। छह दिन में दिल्ली, महाराष्ट्र, उप्र से यहां के अस्पतालों में 63 मरीज आ चुके हैं, इनमें 30 दिल्ली के हैं।

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एयर एंबुलेंस के पेशेंट शिफ्टिंग के 10 रिक्वेस्ट की रिजेक्ट
सिद्धांता रेडक्रास हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. सुबोध वार्ष्णेय ने बताया कि पिछले 5 दिन में एयर एंबुलेंस ऑपरेशन एजेंसी के पेशेंट शिफ्टिंग के 10 रिक्वेस्ट आई हैं। सभी दिल्ली के मरीजों की थी। जो वहां अस्पताल में पलंग नहीं मिलने के कारण भोपाल में भर्ती होकर इलाज कराना चाहते थे। इन सभी मरीजों की रिक्वेस्ट रिजेक्ट कर दी है।

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बंसल में दिल्ली के 10 मरीज भर्ती
बंसल हॉस्पिटल के मैनेजर लोकेश झा ने बताया कि अस्पताल में अभी दिल्ली के 10 कोविड पॉजिटिव मरीज भर्ती हैं। इनमें से केवल 2 मरीजों ने खुद का दिल्ली का एड्रस रिकार्ड में दर्ज कराया है। शेष 8 मरीजों ने एडमिशन फार्म में भोपाल में रह रहे अपने रिश्तेदार का एड्रस नोट कराया है। लेकिन, यह सभी मरीज दिल्ली के रहने वाले हैं।

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सूरत के अनिल भाई बोले- भोपाल में दूसरा जीवन मिला
हमीदिया अस्पताल से शनिवार को डिस्चार्ज हुए अनिल भाई ने बताया कि 15 दिन पहले वे हमीदिया अस्पताल में भर्ती हुए थे। इंफेक्शन बहुत बढ़ गया था। यहां काफी बेहतर इलाज मिला। अब पूरी तरह ठीक हूं। उन्होंने बताया कि एक प्रकार से उन्हें यह दूसरा जीवन मिला है। डॉक्टरों का शुक्रगुजार हूं। अस्पताल से छुट्‌टी के बाद वे वापस गुजरात जा रहे हैं।

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पांच दिन भटके; बेड नहीं मिला एक लाख रु. में एंबुलेंस कर भोपाल आए                                                  नोबल अस्पताल में दिल्ली से आकर भर्ती हुए एक मरीज के परिजनों ने बताया कि संक्रमित होने के बाद पांच दिन तक दिल्ली और आसपास के राज्यों के अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन पलंग नहीं मिला। इसके बाद 1 लाख रुपए में निजी एंबुलेंस से पत्नी सहित भोपाल आकर, नोबल अस्पताल में भर्ती हुए। यहां इलाज के दौरान 75 वर्षीय राधेश्याम (परिवर्तत नाम) की मौत हो गई। इसके दो दिन बाद राधेश्याम की पत्नी की रिपोर्ट कोविड निगेटिव आने पर उन्होंने अस्पताल से छुट्‌टी करा ली।

 

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