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पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में है. दुनिया का हर देश इस संकट से लड़ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के अनुसार, चीन से निकला यह वायरस अब तक 184 देशों में फैल चुका है. और 11,201 लोगों की जान जा चुकी है. कोरोना वायरस की सबसे बुरी मार इटली पर पड़ी है. यहां सबसे ज्यादा लोग मारे गए हैं. 22 मार्च तक इटली में 4032 मौतें हुई हैं. 21 मार्च को एक दिन में सबसे ज्यादा 793 लोगों ने जान गंवाई. इससे एक दिन पहले 627 लोग मारे गए थे.

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चीन ने, जहां सबसे पहले कोरोना के मामले आए थे, इस वायरस पर काबू पाने में कामयाबी हासिल की है. उसके यहां 3,261 लोग कोरोना के चलते मारे गए. लेकिन पिछले एक सप्ताह में चीन ने दावा किया है कि नए मामलों में तेजी से गिरावट आई है.

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लेक्चरर ने बताई इटली की गलतियां

कोरोना वायरस से निपटने के इटली के तरीकों पर कई तरह के सवालिया निशान हैं. वेलेरियो कैप्रारो नाम के एक शख्स ने टि्वटर पर इटली की गलतियों के बारे में लिखा. कैप्रारो लंदन में रहते हैं. उनके टि्वटर बायो के अनुसार वे सीनियर लेक्चरर हैं. 20 मार्च को कैप्रारो ने लिखा है कि ठीक एक महीने पहले इटली में कोरोना वायरस का पहला मामला आया था. मैं बताता हूं कि इसके बाद एक महीने में क्या हुआ. उम्मीद है कि आप हमारी गलतियों से सीखेंगे.

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पहले दो सप्ताह में केवल 11 शहरों को लॉकडाउन किया गया. इस दौरान मरने वालों की संख्या कम थी. राजनेता और महामारी के विशेषज्ञ टीवी पर लड़ रहे थे. कह रहे थे कि यह तो केवल फ्लू (बुखार) है.

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दूसरे सप्ताह के खत्म होते-होते यह साफ हो गया कि वायरस उत्तरी इटली के कई इलाकों में फैल गया है. एक दिन में 50 लोगों की मौत होने लगी. इटली की सरकार ने लोम्बार्डी सहित कई राज्यों को लॉकडाउन करने की कोशिश की. लेकिन दक्षिणपंथी नेताओं को गज़ब का ख़याल आया. उन्होंने कोरोना से लड़ने के कानून के ड्राफ्ट को मीडिया को सौंप दिया. कानून लागू होने से पहले ही लोग डर गए. लोग लोम्बार्डी छोड़ने लगे. लोम्बार्डी को बाद में रेड ज़ोन घोषित कर दिया.

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तीन दिन बाद मरने वालों का आंकड़ा रोजाना 50 से 200 लोगों का हो गया. रेड ज़ोन के बाहर से भी मामले आने लगे. इस पर पीएम ज्यूसिपी कोंटे ने पूरी इटली को लॉकडाउन करने का फरमान सुना दिया.

चौथे सप्ताह में उत्तरी इटली के कुछ शहरों में हेल्थ सिस्टम चरमरा गया. बरगामो शहर में एंबुलेंस के लिए सात घंटे इंतजार करना पड़ रहा है. 87 प्रतिशत लोग घरों के अंदर ही मर गए क्योंकि वे अस्पताल ही नहीं पहुंच पाए. अस्पतालों में पैर रखने की जगह नहीं. वहां लाशों के ढेर लग गए. यह बात मैं बढ़ा-चढ़ाकर नहीं कर रहा हूं. लाशों को ट्रकों में ले जाने के लिए सेना को बुलाया गया.

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इसी बीच दक्षिणी इटली में लोग बीमार पड़ने लग गए. आंकड़े बता रहे हैं कि इनमें से बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिनके बच्चे या रिश्तेदार लॉकडाउन से पहले उत्तरी इटली से भागकर आए थे.

एक महीना हो चुका है. एक दिन में मरने वालों का आंकड़ा 672 हो गया है. एक सुपरमार्केट को बंद करना पड़ा है क्योंकि उसमें काम करने वाला एक व्यक्ति बीमार पड़ गया. इसके बाद बाकी सुपरमार्केट भी बंद कर दिए गए. साफ बात है कि यह केवल फ्लू नहीं है. घर पर रहें. वायरस को फैलने न दें. आज का एक छोटा सा बलिदान कल बड़ा फायदा देगा.

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भारत को इससे क्या सीखना चाहिए?

सरकार ने देश के 75 जिलों में लॉकडाउन कर दिया है. कई राज्य जैसे राजस्थान, पंजाब 31 मार्च तक पूरी तरह बंद कर दिए हैं. ट्रेन और बसों का संचालन भी 31 मार्च तक के लिए रोक दिया गया है. लेकिन अभी भी लोग घरों से बाहर निकलने की आदत नहीं छोड़ पा रहे हैं. साथ ही 22 मार्च को जनता कर्फ्यू से पहले बड़ी संख्या में लोगों ने यात्राएं की. लोग काम करने की जगहों को छोड़कर घरों को गए. ऐसे में कोरोना वायरस का खतरा बढ़ा है. सरकार को बड़े शहरों के साथ ही गांवों के लिए भी योजना बनाने की जरूरत है, नहीं तो जैसा इटली में हुआ वैसा होने का डर है.

https://youtu.be/Mk7Rky4nxcQ