Bihar Dengue Cases: पटना में डेंगू का कहर बना अस्पतालों के लिए कमाई का धंधा, पढ़िए ये स्पेशल रिपोर्ट – bihar dengue cases pvt hospitals making money due to fear of patients

Bihar Dengue Cases: पटना में डेंगू का कहर बना अस्पतालों के लिए कमाई का धंधा, पढ़िए ये स्पेशल रिपोर्ट – bihar dengue cases pvt hospitals making money due to fear of patients

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पटना: राज्य की राजधानी में डेंगू के बढ़ते मामले निजी अस्पतालों के लिए कमाई का धंधा बन गए हैं। वो राज्य के स्वास्थ्य विभाग से विशिष्ट उपचार दिशानिर्देशों के अभाव में जमकर फीस वसूल रहे हैं। मरीजों के तीमारदारों का आरोप है कि सरकार इलाज के नाम पर लूटने वाले ऐसे अस्पतालों पर रोक लगाने में नाकाम है। रविवार को अपनी बेटी को खोने वाले गर्दनीबाग के गोलू कुमार ने टाइम्स न्यूज नेटवर्क को बताया कि उसने अपने बच्चे को बोरिंग रोड के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, यह विश्वास करते हुए कि उसे सबसे अच्छा इलाज मिलेगा। गोलू के मुताबिक ‘मेरी 4 महीने की बेटी दुर्गा पूजा के बाद बीमार पड़ गई, बुखार और मतली जैसे लक्षणों के साथ। मैं उसे अपने क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में ले गया, जहां से उसे नौ अक्टूबर को बोरिंग रोड के एक अन्य निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। उसकी हालत बिगड़ गई और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया।’

‘निजी अस्पताल बने लूट का अड्डा’
गोलू ने आगे बताया ‘अस्पताल ने एक दिन के लिए 27,000 से 32,000 रुपये के बीच फीस ली। मुझे समझ में नहीं आया कि वे इतने पैसे क्यों ले रहे थे। लेकिन मैंने अपनी बेटी के बेहतर होने की उम्मीद में सारे पैसों का भुगतान करना जारी रखा। उसे 10 अक्टूबर को डेंगू का पता चला था। डॉक्टरों ने हाई पावर वाली दवा और इंजेक्शन दिया जिससे उसके शरीर में सूजन आ गई, उसकी किडनी फेल हो गई और उसके अन्य अंग भी प्रभावित हो गए। 13 अक्टूबर को हम उसे एनएमसीएच-पटना ले गए जहां रविवार को उसने अंतिम सांस ली। वह आसानी से ठीक हो सकती थी, अगर सही इलाज दिया जाता, ये डॉक्टरों ने मुझे NMCH में बताया। निजी अस्पताल केवल आम लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसा कमाते हैं, वहां के डॉक्टरों ने कभी भी सीधे जवाब नहीं दिया।’
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‘सिर्फ पानी चढ़ाने के 40 हजार रुपये’
इसी तरह की चिंता व्यक्त करने वाले नंद गोपाल ने कहा कि 90 फीट रोड, भागवत नगर में एक निजी अस्पताल दवा, परीक्षण और अन्य सेवाओं के लिए अत्यधिक शुल्क ले रहा था। उनके मुताबिक ‘मेरी पत्नी निशि कुमारी पिछले हफ्ते डेंगू पॉजिटिव पाई गई। मैं उसे निजी अस्पताल ले गया। तीन दिनों के बाद, उसे छुट्टी मिल गई, लेकिन अस्पताल ने 40 हजार रुपए से अधिक का बिल सौंप दिया। इसके अलावा, उन्होंने हमसे दवाओं और टेस्ट के लिए भी पैसे लिए। सिर्फ स्लाइन और बाकी सुविधाओं की फी 40,000 रुपए कैसे हो सकती है। जब मैंने अस्पताल प्रबंधन से यह पूछा तो मुझे एक बहुत ही बेतुका जवाब मिला कि एडमिट करने से पहले पूछा था क्या? वहीं अस्पताल पंजीकृत भी नहीं है।’

सभी अस्पतालों पर नजर रखना असंभव- सिविल सर्जन
पीएमसीएच के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ कौशल किशोर ने कहा कि डेंगू का कोई इलाज नहीं है। उनके मुताबिक ‘डॉक्टर केवल रोगियों को पर्याप्त पूरक, पोषण और पानी चढ़ाकर शरीर में ताकत बनाए रखते हैं ताकि जिस्म डेंगू से लड़ सके। शरीर के तापमान को बनाए रखने के अलावा डॉक्टर ब्लड काउंट, लीवर फंक्शन और किडनी फंक्शन पर भी नजर रखते हैं।’ पटना के सिविल सर्जन डॉ कमल किशोर रॉय ने कहा कि जिले में करीब 800-900 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, ऐसे में हम सभी अस्पतालों पर कैसे नजर रख सकते हैं। इलाज के बारे में अस्पतालों के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं है। जहां तक फीस पर कैपिंग का सवाल है, राज्य स्वास्थ्य सोसायटी तय करेगी कि डेंगू रोगियों से इलाज के लिए कितना शुल्क लिया जाना चाहिए।’

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