लोकसभा चुनाव से पहले सांसदों को 50 और विधायकों को मिलेंगे 15 करोड़ रुपये

लोकसभा चुनाव से पहले सांसदों को 50 और विधायकों को मिलेंगे 15 करोड़ रुपये

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अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले सांसद और विधायकों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकास कार्य का शिलान्यास और भूमिपूजन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सांसदों को 50 करोड़ रुपये और विधायकों को 15 करोड़ रुपये तक के प्रस्ताव देने का आदेश किया गया है। इस सम्बंध में, 2024-25 के लेखानुदान में भी इसका प्रावधान किया जाएगा, जो 12 या 13 फरवरी को विधानसभा में प्रस्तुत होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे आगामी वित्तीय वर्ष की कार्य योजना में प्राथमिकता के आधार पर इन प्रस्तावों को सम्मिलित करें।

विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले ही अधिकांश सांसद और विधायकों ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास निधि का उपयोग कर चुके हैं और चुनावी प्रत्याशियों ने भी कई वादे किए हैं। विधायक निधि में वृद्धि होने के पहले ही लोकसभा चुनाव होने के कारण, भाजपा सरकार ने सांसद और विधायकों से विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव मांगने का निर्णय लिया है ताकि आचार संहिता लागू होने से पहले भूमिपूजन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सके।

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मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, सांसदों से 50 करोड़ और विधायकों से 15 करोड़ रुपये तक के कामों के प्रस्ताव देने के लिए कहा गया है, जिसमें सड़क, पुल-पुलिया, सामुदायिक भवन जैसे निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से लिया जाएगा। इससे सरकार का पूंजीगत व्यय बढ़ाने का प्रयास भी होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सभी निर्माण विभागों के अधिकारियों से भी यह निर्देश दिया गया है कि वे सांसद और विधायकों के माध्यम से मिलने वाले प्रस्तावों को आगामी वर्ष की कार्य योजना में प्राथमिकता दें। लोक निर्माण विभाग ने तकनीकी परीक्षण के बाद आगामी वर्ष के लिए निविदा आमंत्रित करने का भी आश्वासन दिया है।

सड़कें, पुल, और सामुदायिक भवन जैसे परियोजनाओं पर प्राथमिकता रखी जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, सांसदों से 50 करोड़ और विधायकों से 15 करोड़ तक के कामों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे, जिसमें सड़कें, पुल, पुलिया, सामुदायिक भवन, और अन्य निर्माण कार्यों के लिए विभिन्न प्रस्ताव शामिल होंगे। यह सरकार के पूंजीगत खर्च को बढ़ाने पर जोर देगा और इससे रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। सभी निर्माण विभागों को यह निर्देश दिया गया है कि वे सांसदों और विधायकों के माध्यम से प्राप्त होने वाले प्रस्तावों को आगामी वर्ष की कार्य योजना में प्राथमिकता दें,

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