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अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन पूजा के साथ 14 गांठ वाला अनंत सूत्र बांधते हैं। यह कहा जाता है कि अनंतसूत्र के 14 गांठ 14 लोकों का प्रतीक होती हैं। यह भी मान्यता है कि जो 14 सालों तक लगातार अनंत चतुर्दशी का व्रत रखता है उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। अनन्त सूत्र को पुरुष दाहिने और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं।

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भगवान विष्णु की महिमा बताते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कि ‘हरि अनंत जेहि कथा अनंता… यानी भगवान श्री हरि अनंत हैं, उनकी कथा और महिमा भी अनंत है। उन्हीं अनंत भागवान की अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा की जाती है।

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इस व्रत का जिक्र पुराणों में भी मिलता है, जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे तब भगवान श्रीकृष्ण ने अनंत चतुर्दशी व्रत करने की सलाह दी थी। पांडव विधि-विधान से व्रत कर अनंत सूत्र धारण किए थे। अनंत चतुर्दशी व्रत के प्रभाव से पांडव सब कष्टों से मुक्त हो गए। अनंत पूजा के लिए 12 सितंबर को प्रात: सात बजे से दोपहर 12 बजे तक शुभ मुहूर्त है।