नई दिल्ली.

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आयकर विभाग ने टाटा समूह के 6 ट्रस्टों के रजिस्ट्रेशन गुरुवार को रद्द कर दिए। इनमें जमशेतजी टाटा ट्रस्ट, आर डी टाटा ट्रस्ट, टाटा एजुकेशन ट्रस्ट, टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट, सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट और नवजबाई रतन टाटा ट्रस्ट शामिल हैं। इन ट्रस्टों ने आयकर विभाग के आदेश पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने का फैसला 4 साल पहले से लागू होना चाहिए। उन्होंने 2015 में खुद ही रजिस्ट्रेशन त्यागने (सरेंडर) और आयकर में छूट नहीं लेने का फैसला ले लिया था।

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टाटा ट्रस्टों ने 2015 से पहले जो टैक्स छूट ली वह लौटानी पड़ सकती है: रिपोर्ट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आयकर विभाग ने आईटी एक्ट की धारा 115 (टीडी) के तहत रजिस्ट्रेशन रद्द करने की कार्रवाई की। एक श्रेणी के ट्रस्टों के मामले में 2016 में आईटी एक्ट में यह विशेष प्रावधान जोड़ा गया था। इसके मुताबिक किसी ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर उसे पिछले सालों की उस आय पर भी टैक्स चुकाना पड़ता है जिस पर छूट ली गई हो। कोई ट्रस्ट अगर नॉन-चैरिटेबल ट्रस्ट में मर्ज या कन्वर्ट होता है, तो उसे अतिरिक्त टैक्स भी देना पड़ता है।

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टाटा समूह के ट्रस्टों ने शुक्रवार को कहा कि आयकर विभाग के आदेश की जांच की जा रही है। कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाएंगे। हमारे पास प्रभावी कानूनी मौजूद विकल्प हैं। हम ये भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि आयकर विभाग की ओर से कोई डिमांड नोटिस नहीं मिला है। यह चौंकाने वाली बात है कि ट्रस्टों की संपत्तियां जब्त करने की बात अब क्यों उठ रही है।

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