गोपालदास का 93 वर्ष की उम्र में निधन

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आँगन में दरख़्त पुराना नही रहा..

-मुनव्वर राणा

‘नीरज का निधन काव्य जगत का एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई हो ही नहीं सकती. मैं प्रार्थना करूंगा कि उन्हें स्वर्ग में स्थान मिले

– राहत इंदौरी

गोपालदास सक्सेना जो पूरे भारत के कवि सम्मेलन के मंच पर काव्य पाठ करने वाले ओर हिंदी साहित्यकार फ़िल्मी गीतकार थे वह आज 93 वर्ष की उम्र में शाम 7:35 को दुनिया को अलविदा कह गये निधन के कारण परिजनो ने बार बार सीने में संक्रमण की शिकायत बताया..

कौन थे गोपाल दास..?

गोपाल दास का जन्म 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश में इटावा जिला के ग्राम पुरवाली में हुआ बचपन का नाम नीरज था महज 6 वर्ष की उम्र में नीरज के सर से पिता का साया उठ गया आगे 1942 में एटा से हाई स्कूल की शिक्षा प्राप्त करने के बाद इटावा की कचहरी में टाइपिस्ट का काम किया। आगे की पढ़ाई जारी रखते हुई, दिल्ली में जाकर सफाई विभाग में फिर से टाइपिस्ट, कानपुर के डी ए वी कालेज में क्लर्क ओर आखिर में बल्कर ब्रदर्स नाम की एक प्राइवेट कंपनी में पांच वर्ष तक टाइपिस्ट का काम किया 1949 ने इंटरमीडिएट,1951 में बी ए ,ओर 1953 में प्रथम क्षेणी में हिंदी साहित्य से एम ए किया साथ ही साथ कविता में रुचि रखते हुए बम्बई में फ़िल्म जगत में गीतकार के रूप में पहचान बनाई

और पहली ही फ़िल्म में उनका गीत कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे और देखती ही रहो आज दर्पण न तुम प्यार का यह मुहूर्त निकल जायेगा जैसे गीत लिख कर मशहूर हुए गीत लेखन का सिलसिला मेरा नाम जोकर,शर्मीली ओर प्रेम पुजारी जैसी अनेक सुपरहिट फिल्मों में कई वर्षो तक जारी रहा। बढ़ती उम्र के साथ महान कवि होने के नाते देश विदेश में कवि सम्मेलनों में उसी ठसक के साथ शरीक होते थे और दर्शको का दिल जीतते थे…

इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में, लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में।न पीने का सलीका न पिलाने का शऊर, ऐसे भी लोग चले आये हैं मयखाने मे

-गोपालदास नीरज

इस महान कवि को फ़िल्म जगत में 1970 के दशक में लगातार तीन बार पुरुस्कृत किया गया
1. 1970- काल का पहिया घूमे रे भैया (फ़िल्म चंदा ओर बिजली )
2. 1971 बस यही अपराध में हर बार करता हु (फ़िल्म पहचान)
3. 1972 ए भाई जरा देख के चलो (फ़िल्म मेरा नाम जोकर )

हमेशा मोहब्बत बांटते रहे नीरज: राहत इंदौरी

मशहूर गीतकार गोपालदास नीरज के निधन पर गहरा अफसोस ज़ाहिर करते हुए प्रसिद्ध शायर राहत इंदौरी ने आज उन्हें धर्मनिरपेक्ष रचनाकार बताया और कहा कि उन्होंने हिंदू तथा उर्दू के मंचों पर सबके साथ ताज़िंदगी मोहब्बत बांटी.

‘नीरज के बारे में सबसे बड़ी बात यह है कि वह जितने नामचीन हिंदी कविता के मंचों पर थे, उन्हें उतनी ही शोहरत और मोहब्बत उर्दू शायरी के मंचों पर भी हासिल थी.’

-राहत इंदौरी

उन्होंने कहा, ‘नीरज एक सेकुलर (धर्मनिरपेक्ष) हिंदुस्तानी के साथ एक सेकुलर शायर भी थे. हमारे यहां आजकल दिक्कत यह हो गई है कि हिंदी कविता के मंचों पर अधिकतर कवि हिंदू हो जाते हैं और उर्दू मुशायरों में ज़्यादातर शायर मुसलमान हो जाते हैं. लेकिन नीरज ऐसे कतई नहीं थे और हर मंच पर सबके साथ हमेशा मोहब्बत बांटते थे.’

रिपोर्ट :- चंदन बुनकर

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