‘दो जून की रोटी‘ ,वैसे तो यह साधारण सा मुहावरा है लेकिन इसका जून माह से कोई लेना देना नहीं। यह भी अपुष्ट है कि यह कब और कहाँ से प्रचलन मैं आया, लेकिन इसका षाब्दिक अर्थ कुछ अलग ही है। विक्रम विवि के कुलानुषासक षैलेंद्र षर्मा कहते है कि यह भाषा का रूढ प्रयोग है एवं यह मुहावरा 600 साल पहले प्रचलन में आया। यदि हम इतिहास की दूरबीन से अतीत की पगडंडी को देखते है तो 15 अगस्त 1947 पर आकर हमारी नजरें थम जाती हैं। इस दिन लाल किले से केवल तिरंगा नहीं फहरा बल्कि देष की असंख्य षोषित, अभावग्रस्त और उत्पीडित जनता के तमाम सपने और उम्मीदे भी लहराई थी।

आजादी से आज तक 70 सालों के दौरान हमनें अनेक प्रगति हासिल की है। किन्तु हम एसी प्रोघोगिकी विकसित नहीं कर सकें जिससे भूखे को सहज ही रोटी मिल सकें एवं अनाज के लबालब भरे गोदामों और भूखे पेटो के बीच संबंध स्थापित किया जा सके। भारत के परिपेक्ष में यह बहुत ही गंभीर व चिंतनीय है आखिर क्यो जनतंत्र व व्यवस्था के बीच असमानता की गहरी खाई है ? क्यों देष के मात्र 5 प्रतिषत लोगो के पास देष की 32 प्रतिषत कृषि योग्य भूमि है ? क्यों आज भी देष में 22 करोड लोग गरीबी रेखा के नीचे जीने को मजबूर है ? क्यों मात्र 1 प्रतिषत लोगो के पास देष की 58 प्रतिषत संपत्ति है ?

बेहद कडवा सच है कि एक तरफ तो ऐसे लोग है जिनके घर में खाना खूब बर्बाद होता है और फेंक दिया जाता है वहीे दूसरी और षर्मसार कर देने वाला सच यह भी है कि ऐसे लोगो की भी कमी नहीं है कि जिनको दो जून की रोटी के भी लाले है। मीडिया रिपोर्टो के अनुसार विष्व भर मंे पैदा किया जाने वाला आधा खाघ पदार्थ सड जाता है। चाहे देष विकसित हो या विकासषील यही हाल हर जगह है। यही हाल भारत का भी है। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब करोडो लोग भूखे पेट सोने को मजबूर है। भारत में छह साल से छोटे बच्चों मंे 47 फीसदी कुपोषण के षिकार है। यही नही भारत कुपोषण के मामले में दक्षिण एषिया में अग्रणी है। खास बात यह भी है कि षादियों में खाö पदार्थ की बर्बादी एक बडी वजह है। विचारणीय है आधा अनाज अनुपयागी है इसका खराब होना लगभग तय है, बडी संख्या में लोगो का भूखे पेट सोना भी तय है। तो क्यों न उचिन प्रबंधन के साथ उत्पादन पर भी ध्यान दिया जाए है। खाöान सेवा तभी संभव है जब सभी लोगों को हर समय, पर्याप्त सुरक्षित और पोषक तत्वों से युक्त खाना मिले जो उनकी आहार आवष्यकता को पूरा करें।

इस महत्वपूर्ण समस्या का रिष्ता गरीबी, अषिक्षा, बेरोजगारी से सीधा है तो मजबूत इच्छा षक्ति का प्रदर्षन करके हम इस समस्या पर विजय पा सकते है।

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